Firhad Hakim के बयान पर बढ़ा विवाद: बीजेपी ने की माफी और कार्रवाई की मांग..

Firhad Hakim Kolkata Mayor: पश्चिम बंगाल के कैबिनेट मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के गैर-मुस्लिमों को ‘बदकिस्मत’ बताने वाले बयान ने सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। हकीम ने सार्वजनिक तौर पर इस्लाम कबूल करने का आह्वान किया, जिसके बाद बीजेपी ने इसे हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए माफी और कार्रवाई की मांग की है।बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “हकीम का बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह धार्मिक सहिष्णुता और सौहार्द्र के खिलाफ भी है। हम चाहते हैं कि हकीम अपने बयान के लिए माफी मांगें और सरकार उन्हें तुरंत उनके पद से हटाए।”

TMCने क्या कहा?

वहीं, TMC के प्रवक्ता ने हकीम के बयान को उनके निजी विचार बताते हुए कहा, “फिरहाद हकीम के विचार पार्टी की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करते। TMC सभी धर्मों का सम्मान करती है और हमारे लिए धार्मिक सद्भावना महत्वपूर्ण है।”इस बीच, विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी हकीम के बयान की निंदा की है। एक प्रमुख हिंदू संगठन ने कहा, “ऐसे बयान से समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा मिलता है। हमें एकजुट होकर इस तरह के बयानों का विरोध करना चाहिए।”

पद से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए- अग्निमित्रा पॉल

पश्चिम बंगाल की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम विवादित बयान अपनी प्रतिक्रिया दिया है. पॉल ने कहा “फिरहाद हकीम जो एक मेयर हैं और ममता बनर्जी की पार्टी के सदस्य भी हैं, ने एक कार्यक्रम में कहा है कि वे बहुत भाग्यशाली हैं और जो लोग दूसरे धर्म में पैदा हुए हैं वे बहुत दुर्भाग्यशाली हैं…वह ऐसा कैसे कह सकते हैं? हमें हिंदू होने पर गर्व है और वह ऐसी बात कहने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? और ऐसी बात कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्हें अपने पद से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था…”

क्या कहा था फिरहाद हकीम?

जानकारी के मुताबिक फिरहाद हकीम का विवादित बयान 3 जुलाई, 2024 का है। जब वो कोलकाता के धोनो धोन्यो स्टेडियम में एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे थे. अपनी तकरीर यानी भाषण के दौरान उन्होंने नॉन मुस्लिम यानी हिंदुओं को टारगेट करते हुए ये टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा, ‘जो लोग इस्लाम में पैदा नहीं हुए, वे बदकिस्मत हैं. अगर हम उन्हें दावत (इस्लाम कबूल करने को कहना) दे सकें और उनमें ईमान (इस्लाम के प्रति निष्ठा) ला सकें, तो हम अल्लाह को खुश कर पाएंगे।’

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