बांग्लादेश में आरक्षण पर विवाद,जानें आखिर हिंसा की आग में क्यों धधक रहा है बांग्लादेश?

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हाल ही में सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर विवाद संभावित हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप देशव्यापी हिंसा की घटनाएं फैल गई हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा आरक्षण प्रणाली में अन्यायपूर्णता के आरोपों के बीच टकराव है, और उन्होंने सरकार से आरक्षण की समाप्ति और प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की है।वर्तमान में बांग्लादेश में तनावपूर्ण माहौल है, और सरकार ने शांति बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाए हैं, जैसे कि कर्फ्यू और इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगाना। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसात्मक संघर्ष रिपोर्ट किए गए हैं, जिसमें कई लोगों की मौत और घायल होने की खबरें हैं।

छात्र देश में असहयोग अभियान चला रहे हैं। रविवार को पुलिस बलों और प्रदर्शनकारियों की कम से कम 20 जिलों में झड़प हुई। प्रदर्शनकारी लगातार प्रदर्शन करके प्रधानमंत्री शेख हसीना पर इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाए रखना चाहते हैं।

नहीं रुक रहे प्रदर्शन

बांग्लादेश में लिबरेशन मूवमेंट में शामिल लोगों के परिवारों को दिए जाने वाले रिजर्वेशन के खिलाफ पिछले महिने प्रदर्शन शुरू हुए थे. शुरू में प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन 15 जुलाई को ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प के बाद यह हिंसक हो गए. 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सरकार ने इस कोटा को 30 फीसद से घटाकर 5 फीसद कर दिया, लेकिन इसके बावजूद हिंसा और विरोध प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब तक प्रदर्शनों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हैं.

इंटरनेट, स्कूल और यूनिवर्सिटी बंद

फिर भड़की हिंसा की आग के बाद सरकार ने देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने देशभर में शाम छह बजे से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है. सरकार के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के आंदोलन में बड़े पैमाने पर हुई झड़पों और जानमाल के नुकसान के बाद फैसला लिया गया है. इसके अलावा देश के स्कूल और कॉलेजों की क्लासों को भी रद्द कर दिया गया है. बांग्लादेश पुलिस ने अब तक 11 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

जानें क्या है आरक्षण विवाद?

बांग्लादेश (Bangladesh)में आरक्षण प्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार द्वारा दी गई 30% आरक्षण, जो स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के परिवार वालों के लिए है, उसमें अन्यायपूर्णता है। उनका कहना है कि इस आरक्षण के चलते मेरिट के आधार पर नौकरियां देने में बाधा उत्पन्न हो रही है और यह सिस्टम उनके भविष्य को उजाड़ रहा है।इस विवाद के संबंध में छात्रों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार इस आरक्षण प्रणाली का समर्थन कर रही है, जिससे वे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के परिवारों के समर्थन में दिखाई दे रही हैं। इसके बजाय, वे मांग कर रहे हैं कि सरकार को मेरिट और समानता के सिद्धांत पर नौकरियां प्रदान करनी चाहिए।

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