हाइपोथैलेमस तय करता है शरीर का तापमान
हमारे दिमाग में हाइपोथैलेमस नाम का एक हिस्सा होता है, जिसे शरीर का थर्मोस्टेट भी कहा जाता है। इसका काम शरीर के तापमान को नियंत्रित करना है। आमतौर पर शरीर का सामान्य तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फारेनहाइट माना जाता है। हालांकि, यह हर व्यक्ति में थोड़ा अलग हो सकता है।
जब शरीर में वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण होता है तो इम्यून सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इस दौरान शरीर कुछ खास रसायन छोड़ता है, जिन्हें पाइरोजेन कहा जाता है। ये रसायन दिमाग के हाइपोथैलेमस को शरीर का तापमान बढ़ाने का संकेत देते हैं। इसके बाद हाइपोथैलेमस तापमान का नया लक्ष्य निर्धारित कर देता है।
शरीर गर्म होने पर भी क्यों लगती है ठंड?
दरअसल, जब हाइपोथैलेमस शरीर का तापमान बढ़ाने का नया लक्ष्य तय करता है तो शरीर का मौजूदा तापमान उस लक्ष्य से कम होता है। ऐसे में दिमाग को लगता है कि शरीर अभी ठंडा है और उसे और गर्म करने की जरूरत है।
यही वजह है कि बुखार चढ़ने के दौरान ठंड महसूस होती है। इस समय हाथ-पैर ठंडे पड़ सकते हैं और शरीर में कंपकंपी शुरू हो जाती है। दरअसल, मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती और ढीली होती हैं, जिससे गर्मी पैदा होती है और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। इसी कारण शरीर गर्म होने के बावजूद व्यक्ति को ठंड लगती है और दांत किटकिटाने लगते हैं।
बुखार उतरते समय क्यों आता है पसीना?
जब शरीर संक्रमण से लड़ने लगता है और बुखार कम होने की प्रक्रिया शुरू होती है तो हाइपोथैलेमस तापमान का लक्ष्य फिर से नीचे कर देता है। अब शरीर का वास्तविक तापमान नए लक्ष्य से ज्यादा होता है।
ऐसे में शरीर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है। इसके लिए पसीना निकलने लगता है और त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, जिससे शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर निकलती है। यही कारण है कि बुखार उतरते समय कई लोगों को खूब पसीना आता है और ठंड लगना कम हो जाता है।
बुखार होने पर किन बातों का रखें ध्यान?
बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें और पर्याप्त मात्रा में पानी व दूसरे तरल पदार्थ लेते रहें। समय-समय पर शरीर का तापमान भी चेक करते रहें।
अगर बुखार लगातार बना रहे या इसके साथ सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। तेज या बिगड़ते लक्षणों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।
