क्या है भारत का स्वदेशी NavIC सिस्टम?
NavIC यानी Navigation with Indian Constellation भारत का अपना क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। इसे आसान भाषा में भारत का स्वदेशी GPS कहा जा सकता है। अमेरिकी GPS की तरह पूरी दुनिया में सेवाएं देने के बजाय NavIC को विशेष रूप से भारत और इसके आसपास के लगभग 1,500 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करने के लिए विकसित किया गया है।
यह सिस्टम मुख्य रूप से तीन तरह की सेवाएं प्रदान करता है। इनमें सटीक भौगोलिक स्थिति की जानकारी (Positioning), रास्ते और दिशा बताने वाली नेविगेशन सेवा (Navigation) और सटीक समय की जानकारी (Timing) शामिल हैं।
इसका इस्तेमाल आम नागरिकों के साथ-साथ परिवहन, आपदा प्रबंधन, संचार और रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है।
NVS-03 सैटेलाइट की अंतरिक्ष यात्रा और तकनीकी खूबियां
GSLV-F18 रॉकेट की यह 20वीं उड़ान थी। इसने 2,232 किलोग्राम के NVS-03 उपग्रह को सफलतापूर्वक जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में पहुंचाया।
प्रक्षेपण के बाद उपग्रह की कक्षा में पृथ्वी से सबसे नजदीकी बिंदु यानी पेरिजी 170 किलोमीटर और सबसे दूर का बिंदु यानी एपोजी 37,023 किलोमीटर दर्ज किया गया।
अब उपग्रह अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्शन इंजन की मदद से निर्धारित अंतिम जियोसिंक्रोनस कक्षा की ओर बढ़ेगा। इसे 32.5 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थापित करने की योजना है।
इस उपग्रह के शामिल होने से NavIC के लिए चार क्रियाशील उपग्रहों का जरूरी कॉन्फिगरेशन पूरा होने की बात कही गई है। इससे भारत की स्वतंत्र नेविगेशन सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
रक्षा क्षेत्र में कैसे मिलेगी मदद?
भारत के लिए स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम का मजबूत होना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। NavIC के जरिए भारतीय एजेंसियों को लोकेशन और समय संबंधी सेवाओं के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
खासकर सैन्य अभियानों, सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में सटीक लोकेशन की जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है।
इसके अलावा परिवहन, मछुआरों की सुरक्षा, वाहन ट्रैकिंग और आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी NavIC की भूमिका अहम हो सकती है।
