Brij Bhushan Singh : बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही पराली जलाने की घटनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में खेतों में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है, लेकिन इसे रोकने के लिए जमीन पर कोई खास प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। बृजभूषण ने सवाल उठाया कि जब पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कानून बने हुए हैं और ड्रोन कैमरों से निगरानी की व्यवस्था भी है, तो फिर इन घटनाओं पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? इस दौरान उन्होंने नंदिनी माता मंदिर परिसर में आयोजित भव्य दीपोत्सव के बारे में भी जानकारी दी।
पराली जलाने की घटनाओं पर बृजभूषण शरण सिंह ने जताई नाराजगी
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि हाल ही में हेलीकॉप्टर से सफर के दौरान उन्होंने बस्ती, गोरखपुर और गोंडा समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में पराली जलते हुए देखी। उन्होंने कहा कि आसमान से देखने पर कई जगहों पर खेतों में आग लगी दिखाई दी। इससे साफ है कि प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं अभी भी बड़े पैमाने पर हो रही हैं।
उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए कई नियम बनाए गए हैं। इतना ही नहीं, खेतों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों के इस्तेमाल का भी प्रावधान है। इसके बावजूद अगर किसान लगातार पराली जला रहे हैं, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
पराली रोकने के लिए कानून और ड्रोन निगरानी पर उठाए सवाल
बीजेपी के पूर्व सांसद ने कहा कि पराली जलाने से रोकने के लिए सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि उनका सही तरीके से पालन भी होना चाहिए। जब निगरानी की व्यवस्था मौजूद है, तो फिर खेतों में पराली कैसे जलाई जा रही है? कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ से लापरवाही हो रही है।
उन्होंने इस मामले में प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई। उनका कहना है कि अगर समय रहते पराली जलाने की घटनाओं को नहीं रोका गया, तो इसका असर पर्यावरण और लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए।
नंदिनी माता मंदिर में क्यों मनाया गया भव्य दीपोत्सव?
पराली जलाने के मुद्दे के साथ बृजभूषण शरण सिंह ने नंदिनी माता मंदिर परिसर में आयोजित दीपोत्सव के पीछे की धार्मिक और पौराणिक मान्यता भी बताई। उन्होंने कहा कि अयोध्या के उत्तरी तट पर स्थित यह स्थान भगवान राम के पूर्वजों से जुड़ा हुआ है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
मान्यता के अनुसार, महाराजा दिलीप ने इसी स्थान पर नंदिनी गौ माता की सेवा की थी। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर नंदिनी माता ने उन्हें श्राप से मुक्ति दी थी। इसके बाद आगे चलकर उनके वंश में भगीरथ का जन्म हुआ। इसी पौराणिक प्रसंग को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर नंदिनी माता का मंदिर बनवाया गया है।
नंदिनी माता मंदिर के बाद बनाया गया बड़ा विद्यालय
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि नंदिनी माता के नाम पर यहां एक बड़ा विद्यालय भी बनवाया गया है। उनका कहना है कि मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद उनके मन में इस ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले स्थान पर भी दीपोत्सव आयोजित करने का विचार आया।
इसी सोच के साथ इस बार मंदिर परिसर में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरे परिसर को दीपों से रोशन किया गया और श्रद्धा के साथ उत्सव मनाया गया।
घर के सरसों तेल से जलाए गए दीप, जनवरी में होगी राष्ट्र कथा
इस दीपोत्सव की एक खास बात यह रही कि दीप जलाने के लिए बाजार से तेल खरीदने के बजाय घर के सरसों तेल का इस्तेमाल किया गया। बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि दीपोत्सव में घर के सरसों तेल से दीप जलाए गए। इसके जरिए इस आयोजन को पारंपरिक और धार्मिक भावना से जोड़ने की कोशिश की गई।
इसके साथ ही उन्होंने जनवरी के पहले सप्ताह में नंदिनी माता मंदिर परिसर में भव्य राष्ट्र कथा आयोजित करने की जानकारी भी दी। इस आयोजन को लेकर तैयारियां की जाएंगी। कुल मिलाकर, बृजभूषण शरण सिंह ने एक तरफ प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ नंदिनी माता मंदिर के धार्मिक महत्व और दीपोत्सव के आयोजन के जरिए इस पौराणिक स्थल की पहचान को सामने रखा।
