UP News: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच नेताओं के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के बीच एक बार फिर सियासी जुबानी जंग देखने को मिली है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया।
राजभर ने अपनी पोस्ट की शुरुआत ‘गुड मॉर्निंग मित्र’ से की, लेकिन इसके बाद उन्होंने सपा प्रमुख पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव शायद अभी भी अपनी अलग दुनिया में खोए हुए हैं, जबकि अहीर समाज अब जाग चुका है और उनकी राजनीति को समझने लगा है।
‘पहला ऐसा यादव नेता देखा जो अहीर-अहीर में भेद करता हो’
ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने पहला ऐसा यादव नेता देखा है, जो अहीर समाज के लोगों के बीच ही अंतर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की राजनीति में सभी यादवों को बराबर का स्थान नहीं मिलता।
राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहले उन्हें लगता था कि यादव समाज के सभी लोगों को अखिलेश एक नजर से देखते होंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं लगता। उनके मुताबिक, सपा प्रमुख के लिए भी समाज में अपने और पराए का अंतर है। राजभर ने इसे अहीर समाज के भीतर भेदभाव बताते हुए अखिलेश यादव से सवाल किया।
85 फीसदी ग्वाला और 15 फीसदी कमरिया का मुद्दा उठाकर घेरा
सुभासपा अध्यक्ष ने अपने बयान में यादव समाज के भीतर ग्वाला और कमरिया समुदाय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब तक वह यही जानते थे कि अहीर दो तरह के होते हैं। एक भगवान श्रीकृष्ण को मानने वाले और दूसरे अखिलेश यादव व उनके सपाई। लेकिन अब उन्हें पता चल रहा है कि अखिलेश यादव की राजनीति में भी अहीर समाज को 85 और 15 फीसदी के हिस्सों में देखा जाता है।
राजभर ने दावा किया कि 15 फीसदी कमरिया वर्ग को अखिलेश यादव अपना मानते हैं, जबकि 85 फीसदी घोसी यानी ग्वाला समाज को वह उतनी अहमियत नहीं देते। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही समाज के लोगों के साथ इस तरह का अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
अखिलेश यादव पर धर्म और जाति के नाम पर राजनीति करने का आरोप
ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव की राजनीति पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले नेताओं ने धर्म के नाम पर जनता को बांटा और अब अखिलेश यादव जाति के नाम पर लोगों को बांटने में लगे हैं। राजभर के मुताबिक, अब यह राजनीति अहीर समाज के भीतर भी भेदभाव तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि गाय-भैंस की सेवा करने वाले अहीर भाई अब जाग चुके हैं और सपा की राजनीति को समझने लगे हैं। राजभर का यह बयान यादव समाज के भीतर अलग-अलग वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर है।
2027 चुनाव से पहले राजभर ने अखिलेश यादव से पूछे टिकटों के आंकड़े
अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से 2017 से 2024 तक हुए चुनावों में टिकट वितरण का हिसाब मांगा। उन्होंने पूछा कि समाजवादी पार्टी ने इस दौरान कितने घोसी यानी ग्वाला समाज के लोगों को टिकट दिया और कितने कमरिया समुदाय के नेताओं को चुनाव लड़ने का मौका मिला।
राजभर ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि अब उन्हें जाग जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में 85 फीसदी वाला ग्वाला समाज सपा को 2022 से भी बुरे दौर में पहुंचाने वाला है।
राजनीतिक जानकारों की नजर में राजभर का यह हमला 2027 से पहले यादव समाज के भीतर जातीय प्रतिनिधित्व और वोट बैंक की राजनीति को लेकर सपा पर दबाव बनाने की कोशिश है। हालांकि, इस पोस्ट पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सियासी तस्वीर और साफ हो सकती है।
