Cyclone Murasu: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुरासु हुआ ताकतवर, आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का अलर्ट, ओडिशा में हाई अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुरासु (Cyclone Murasu) तेजी से ताकतवर होता जा रहा है। यह तूफान अब आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने इसके गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई है। तूफान के खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, ओडिशा सरकार ने भी अपने दक्षिणी जिलों में प्रशासन को सतर्क कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान के दौरान 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

23 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा तूफान

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार सुबह 11:30 बजे चक्रवात मुरासु को लेकर ताजा बुलेटिन जारी किया। इसके मुताबिक, तूफान करीब 23 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। फिलहाल यह दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात का केंद्र चेन्नई से करीब 560 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से 660 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और नेल्लोर से लगभग 630 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में है। इसकी लगातार बढ़ती ताकत को देखते हुए मौसम विभाग हालात पर नजर बनाए हुए है।

गंभीर चक्रवाती तूफान बनेगा Cyclone Murasu

IMD का अनुमान है कि 2 नवंबर की सुबह तक चक्रवात मुरासु और ज्यादा ताकतवर होकर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके बाद यह उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के तट की तरफ पहुंचेगा। मौसम विभाग ने इसके तटीय इलाकों में पहुंचने को लेकर चेतावनी जारी की है।

अनुमान है कि तूफान जब आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा, उस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। वहीं, हवा के तेज झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकते हैं। ऐसे में पेड़ गिरने, बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने और कमजोर मकानों को क्षति होने का खतरा बना हुआ है।

नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट से टकरा सकता है तूफान

मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवात मुरासु के 2 नवंबर की देर रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की संभावना है। इसके नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट से टकराने का अनुमान है। IMD ने इसके लिए 2 नवंबर रात 11:30 बजे से 3 नवंबर सुबह 4 बजे तक का संभावित समय बताया है।

इस दौरान आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका है। प्रशासन को अलर्ट रहने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

ओडिशा के दक्षिणी जिलों में हाई अलर्ट, राहत-बचाव की तैयारी तेज

चक्रवात मुरासु का असर सिर्फ आंध्र प्रदेश तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। तूफान के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने संबंधित जिलों के प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को खतरे का अंदेशा होने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। इसके अलावा राहत शिविरों और जरूरी सुविधाओं को लेकर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तुरंत मदद मिल सके।

मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह, NDRF तैनात

चक्रवात के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने मछुआरों के लिए भी खास एडवाइजरी जारी की है। उन्हें 2 नवंबर से 4 नवंबर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। समुद्र में पहले से मौजूद मछुआरों को भी सुरक्षित लौटने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, संवेदनशील इलाकों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) के जवानों को तैनात किया गया है। प्रशासन का कहना है कि तूफान से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। मौसम विभाग लगातार चक्रवात की दिशा और उसकी रफ्तार पर नजर रख रहा है। आने वाले कुछ घंटे आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों के लिए काफी अहम रहने वाले हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *