Rakesh Tikait: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपनी असंतुष्टि जाहिर की हैं। उनके अनुसार, बजट में किसानों के हितों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है और यह केवल एक कागजी दस्तावेज़ है, जिससे किसान और मजदूर समुदाय को कोई फायदा नहीं होने वाला है।
बजट में किसानों की निगरानी
राकेश टिकैत ने बताया कि बजट का कुल आकार 48 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन इसमें किसानों के हिस्से केवल 1.52 लाख करोड़ रुपये हैं, जो कि देश की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए बहुत कम है। उनके अनुसार, सरकार ने किसानों के लिए केवल तीन प्रतिशत बजट में सीमित किया है, जो ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ा भेदभाव है।
किसानों की मांगों पर कोई प्रावधान नहीं
टिकैत ने बजट में किसानों की मांगों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जैसे कि एमएसपी गारंटी कानून, कर्जमाफी, कृषि उपकरणों पर जीएसटी कम करने की मांग और प्रत्येक किसान परिवार को पेंशन देने की मांग। उन्होंने कहा कि सरकार बजट में कॉरपोरेट कंपनियों को बड़ी छूट दे रही है, जो कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक नई योजना है, जिससे कि किसानों और मजदूरों को लूटा जा सकता है।
