बार-बार खांसी और गले में खराश हो सकती है प्रदूषण की निशानी
अगर आपको दिन में कई बार खांसी आती है, गले में खुजली होती है या बार-बार गला साफ करने की जरूरत पड़ती है, तो इसके पीछे प्रदूषित हवा एक वजह हो सकती है। हवा में मौजूद धूल और धुएं के कण सांस की नली को प्रभावित करते हैं। इससे सूखी खांसी, गले में जलन और खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को नाक में जलन, छींक आने और आंखों से पानी निकलने की परेशानी भी होती है। हालांकि, ये लक्षण एलर्जी, संक्रमण या दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं।
सांस लेने में परेशानी और सीने में जकड़न को न करें नजरअंदाज
वायु प्रदूषण का असर केवल गले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह फेफड़ों और सांस लेने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से कुछ लोगों को सांस फूलने, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। अस्थमा या सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों से परेशान लोगों में लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। अगर बाहर निकलने के बाद आपकी खांसी बढ़ जाती है या सांस लेने में परेशानी होने लगती है, तो वायु गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। गंभीर सांस की तकलीफ या सीने में तेज दर्द होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।
वायु प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके
प्रदूषण के संपर्क को कम करने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना फायदेमंद हो सकता है। बाहर निकलने से पहले अपने इलाके के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की जानकारी लें। प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर गैरजरूरी बाहरी गतिविधियों और लंबे समय तक बाहर रहने से बचें। बाहर जाना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल कर सकते हैं। घर में धूल को नियमित रूप से साफ करें और धूम्रपान सहित अन्य तरह के धुएं से दूर रहें। पर्याप्त पानी पीने से गले को आराम मिल सकता है, लेकिन इससे प्रदूषण का असर खत्म नहीं होता।
लगातार खांसी होने पर कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर खांसी कई दिनों तक बनी रहती है, लगातार बढ़ रही है या उसके साथ बुखार, घरघराहट अथवा सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें। खांसी को केवल बदलते मौसम का असर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। इसके पीछे एलर्जी, संक्रमण, अस्थमा या वायु प्रदूषण समेत कई कारण हो सकते हैं। सही कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
