नेतन्याहू गुट को लगा बड़ा झटका
केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने शुक्रवार तड़के 2026 के राष्ट्रीय चुनावों के अंतिम परिणाम जारी किए। इस बार नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को पिछली संसद के मुकाबले बड़ा नुकसान हुआ है। पिछली संसद में इस गठबंधन के पास 68 सीटें थीं, जो अब घटकर 53 रह गई हैं।
दूसरी ओर, नेतन्याहू विरोधी गुट को 48 सीटें मिली हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख खेमे बहुमत के आंकड़े से काफी दूर हैं। इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
अंतिम चुनाव परिणामों के मुताबिक इजरायल की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- लिकुद पार्टी: 27 सीटें
- यशार: 21 सीटें
- बी’याचाद: 12 सीटें
- जॉइंट लिस्ट: 11 सीटें
- द डेमोक्रेट्स: 8 सीटें
- रा’अम: 8 सीटें
- यिसराएल बेतेनु: 7 सीटें
- यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म: 7 सीटें
- ओत्ज्मा येहुदित: 7 सीटें
- शस: 6 सीटें
- रिलीजियस जायोनिज्म: 6 सीटें
अरब पार्टियों के हाथ में सत्ता की चाबी
इस चुनाव में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। जॉइंट लिस्ट और रा’अम ने मिलकर 19 सीटें हासिल की हैं। यह अब तक का उनका सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले इन पार्टियों के पास कुल 10 सीटें थीं।
सरकार गठन के लिहाज से इन पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, नेतन्याहू विरोधी गुट के कई जायोनी दलों ने अरब पार्टियों के साथ सहयोग करने से इनकार किया है। ऐसे में विपक्षी गठबंधन के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती बनी हुई है।
चुनावी धांधली के आरोपों पर चुनाव समिति का बयान
चुनाव परिणामों के बीच कथित चुनावी धांधली को लेकर भी विवाद सामने आया। कुछ रिपोर्टों में आरोप लगाया गया था कि कतर की ओर से मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है।
हालांकि, केंद्रीय चुनाव समिति ने बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के दावों को खारिज किया है। समिति के कार्यवाहक निदेशक डीन लिवने ने इन रिपोर्टों को बेबुनियाद बताया। CEC ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच का अंतिम चुनाव परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राष्ट्रपति हर्ज़ोग के सामने सरकार गठन की चुनौती
अंतिम नतीजों के बाद केंद्रीय चुनाव समिति राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को आधिकारिक परिणाम सौंपेगी। इसके बाद राष्ट्रपति सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में पार्टियां अपनी सिफारिश देंगी कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जानी चाहिए।
राष्ट्रपति हर्ज़ोग पहले ही राजनीतिक दलों से अपील कर चुके हैं कि देश को एक और चुनाव की स्थिति से बचाने के लिए सभी पक्ष खुले मन से बातचीत करें।
नेतन्याहू और आइसेनकोट ने सरकार बनाने का किया दावा
बहुमत नहीं मिलने के बावजूद बेंजामिन नेतन्याहू और उनके विरोधी नेता आइसेनकोट दोनों ने अगली सरकार बनाने का दावा किया है। ऐसे में इजरायल में गठबंधन की राजनीति और तेज होने की संभावना है।
नेसेट में 10 नवंबर को शपथ ग्रहण प्रस्तावित है। हालांकि, सरकार गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाना आसान नहीं होगा। अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति की बैठकों और राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।
