रिटायरमेंट प्लानिंग में क्यों जरूरी है इमरजेंसी फंड?
पर्सनल फाइनेंस एडवाइजर विश्वजीत परासर के मुताबिक, रिटायरमेंट लंबी अवधि का लक्ष्य है। इसके लिए इक्विटी निवेश कंपाउंडिंग के जरिए समय के साथ संपत्ति बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेश के मूल्य में बदलाव होता रहता है।
ऐसे में पर्याप्त इमरजेंसी फंड होने से अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर निवेश बेचने की मजबूरी कम हो सकती है। इससे बाजार में गिरावट के दौरान घबराहट में निवेश बेचने से बचने और रिटायरमेंट के लिए रखी गई रकम को लंबे समय तक निवेशित रखने में मदद मिलती है।
कम से कम तीन महीने के खर्च के बराबर रखें फंड
फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय सबसे पहले अपने जरूरी मासिक खर्चों का आकलन करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, इमरजेंसी फंड में कम से कम तीन महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम रखने का लक्ष्य बनाया जा सकता है।
इसमें घर का किराया या होम लोन की किस्त, राशन, बिजली-पानी के बिल, दवाइयां, बीमा प्रीमियम और अन्य जरूरी खर्च शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अलग होती है, इसलिए इमरजेंसी फंड की सही रकम भी अलग हो सकती है।
किसे बड़ा इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए?
अगर आपकी आमदनी नियमित नहीं है, आप स्वरोजगार करते हैं या परिवार के कई सदस्य आपकी कमाई पर निर्भर हैं, तो आपको तीन महीने से अधिक के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखने पर विचार करना चाहिए। नौकरी की अनिश्चितता या अधिक वित्तीय जिम्मेदारियां होने पर छह से बारह महीने के जरूरी खर्च के बराबर बचत का लक्ष्य उपयोगी हो सकता है।
इमरजेंसी फंड कहां रखें?
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य सिर्फ पैसा बचाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय उसे आसानी से उपलब्ध रखना भी है। इसलिए इस रकम का बड़ा हिस्सा ऐसे सुरक्षित और आसानी से निकाले जा सकने वाले विकल्पों में रखना बेहतर हो सकता है, जैसे बचत खाता या उपयुक्त लिक्विड निवेश विकल्प। निवेश चुनने से पहले उससे जुड़े जोखिम, निकासी की शर्तें और संभावित शुल्क समझना जरूरी है।
रिटायरमेंट और इमरजेंसी फंड को रखें अलग
फाइनेंशियल प्लानिंग में रिटायरमेंट निवेश और इमरजेंसी फंड के उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। रिटायरमेंट फंड भविष्य की लंबी अवधि की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया जाता है, जबकि इमरजेंसी फंड अचानक आने वाली वित्तीय मुश्किलों में मदद करता है।
