जामिया छात्र प्रदर्शन की 3 प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की है। दूसरी मांग मुख्य प्रॉक्टर को हटाने की है, जबकि तीसरी मांग प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन में शामिल छात्र फैजान ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी एडवाइजर का व्यवहार छात्रों के प्रति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी एडवाइजर गाली देकर बात करते हैं और प्रशासन छात्रों को परेशान कर रहा है। छात्रों ने मांग की है कि इस मामले में कार्रवाई की जाए।
छात्र संघ चुनाव पर कमेटी बनी, लेकिन तारीख घोषित करने की मांग जारी
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि चुनाव कराने की प्रक्रिया के साथ-साथ चुनाव की तारीख या स्पष्ट समयसीमा भी घोषित की जाए।
24 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच टकराव की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी कक्षाएं ऑनलाइन करने और लाइब्रेरी बंद रखने का फैसला लिया। कैंपस में विवादित नारे लिखे जाने का मामला भी सामने आया है। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इन नारों से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।
जामिया में हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिलने से छात्र परेशान
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिलने की शिकायत भी की है। छात्र अरमान मलिक ने बताया कि उनका हॉस्टल यूनिवर्सिटी के अंदर है, लेकिन पहचान पत्र होने के बावजूद उन्हें प्रवेश नहीं दिया जा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि लंच के समय वे खाना खाने कहां जाएं। अरमान ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद उन्हें हेल्थ केयर सेंटर जाने में परेशानी हो रही है।
छात्रों का कहना है कि हॉस्टल में प्रवेश रोकने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि कुछ छात्रों को अपने ही हॉस्टल में जाने से रोका जा रहा है, जबकि वहां उनका रहना जरूरी है।
मेडिकल इमरजेंसी और सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार पर भी सवाल
छात्र मोहम्मद आर्यन ने बताया कि उन्हें हॉस्टल नहीं मिल पाया है और कैंपस के अंदर मेडिकल इमरजेंसी की सुविधा होने के बावजूद वहां पहुंचने में परेशानी हो रही है। अन्य छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मी उनके साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं और कुछ छात्रों को कथित तौर पर अपमानजनक शब्द भी कहे गए हैं।
महिला छात्रों ने भी आरोप लगाया कि पहचान पत्र होने के बावजूद उन्हें हॉस्टल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा और मेडिकल इमरजेंसी के समय अस्पताल जाने में भी दिक्कत हो रही है। एक छात्रा ने कहा कि यह उनकी यूनिवर्सिटी है और हॉस्टल भी यहीं है, फिर भी उन्हें अंदर जाने से रोका जा रहा है।
जामिया प्रशासन से छात्र संघ बहाली की मांग, आंदोलन जारी
छात्रों का कहना है कि अगर यूनिवर्सिटी में छात्र संघ होता, तो उनकी समस्याओं को उचित मंच पर उठाया जा सकता था। उनके मुताबिक, हॉस्टल, मेडिकल सुविधाओं और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में छात्र संघ की अहम भूमिका हो सकती है।
फिलहाल, जामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। छात्रों ने प्रशासन से अपनी मांगों पर स्पष्ट फैसला लेने की अपील की है। वहीं, हॉस्टल में प्रवेश, मेडिकल सुविधाओं और सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
