‘पूरी तरह अराजकता’: दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी की आलोचना की, अवैध निर्माण पर कड़ी फटकार

High Court: ने एमसीडी की अवैध निर्माण में विफलता पर लगाई फटकार

High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की अवैध निर्माणों को नियंत्रित करने में विफलता पर कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि एमसीडी अधिकारियों की लापरवाही के कारण पूरे शहर में “अराजकता” फैल गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने अधिकारियों में “नैतिक साहस की कमी” की बात की और स्पष्ट किया कि आदेश पारित करने और उन्हें लागू करवाने की जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं हो रहा है।

High Court: अदालत की टिप्पणी और नाराजगी

अदालत ने विशेष रूप से छत में छेद करके या इमारत के चारों ओर धागा बांधकर सील लगाने को “कॉस्मेटिक विध्वंस” करार दिया। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही के पीछे कोई गहरा कारण और दुर्भावना हो सकती है। पीठ ने एमसीडी आयुक्त से सवाल किया कि आदेश पारित करने और उन्हें लागू करने में क्या गड़बड़ी है, और यह भी जताया कि प्रशासनिक ढांचे में कुछ बुनियादी समस्याएं हो सकती हैं।

High Court: दिल्ली के दीप विहार में अवैध निर्माण की याचिका

यह मामला संतोष नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर आधारित है, जिसमें दिल्ली के दीप विहार में एक संपत्ति के अनधिकृत निर्माण को सील करने और ध्वस्त करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि एमसीडी और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकारियों ने तीन विध्वंस आदेशों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अदालत ने एमसीडी आयुक्त और डीसी नरेला ज़ोन की उपस्थिति की मांग की और इस मुद्दे पर जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अदालत की कार्रवाई और निर्देश

अदालत ने स्पष्ट आदेश और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि जमीनी स्तर पर स्पष्टता की कमी है। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने डीसी, एमसीडी नरेला जोन, और उनके पूर्ववर्ती को नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

निष्कर्ष

दिल्ली उच्च न्यायालय की यह फटकार एमसीडी के अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें और अवैध निर्माणों के खिलाफ ठोस कदम उठाएं। अदालत की यह टिप्पणी और आदेश दिल्ली में अवैध निर्माणों पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साबित हो सकते हैं।

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