पार्टी की कोशिश है कि सिर्फ सीटों की संख्या के आधार पर दावा न किया जाए, बल्कि यह भी बताया जाए कि कांग्रेस किन सीटों पर मजबूत है और वहां जीत कैसे हासिल कर सकती है। एक हफ्ते के भीतर रणनीति कमेटी प्रियंका गांधी को दोबारा रिपोर्ट सौंप सकती है।
प्रियंका गांधी के सामने रखे जाएंगे जातीय और सामाजिक समीकरण
कांग्रेस की इस रिपोर्ट में हर सीट के कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें जातीय समीकरण, सामाजिक आधार, इलाके की भौगोलिक स्थिति, महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका के साथ सीट का राजनीतिक इतिहास भी शामिल होगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि किस सीट पर कौन-सा उम्मीदवार पार्टी के लिए सबसे बेहतर साबित हो सकता है।
कांग्रेस यह समझने की कोशिश कर रही है कि किन इलाकों में उसका पुराना वोट बैंक अब भी मजबूत है और कहां संगठन को और मेहनत करने की जरूरत है। रिपोर्ट में सीटवार जीत की संभावनाओं और पार्टी की ताकत का आकलन भी शामिल रहेगा।
सपा के साथ सीट बंटवारे में 150 सीटों पर मजबूत दावा करने की तैयारी
कांग्रेस की रणनीति का एक अहम हिस्सा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करना है। पार्टी चाहती है कि जब दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत हो, तो उसके पास 150 सीटों के समर्थन में ठोस आंकड़े और तर्क मौजूद हों।
इसी सिलसिले में प्रियंका गांधी एक हफ्ते बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस की पूरी टीम और राज्य के सांसदों के साथ भी बैठक कर सकती हैं। इस दौरान नेताओं से जमीनी हालात, संगठन की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। हालांकि, सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर अभी किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
यूपी में कांग्रेस की तैयारी तेज, सीटों की मांग पर अलग-अलग राय
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नेता सीट बंटवारे को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ नेताओं की तरफ से 200 सीटों तक की मांग की चर्चा है, जबकि कुछ नेता 150 सीटों पर दावेदारी की बात कर रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से सीटों की संख्या को लेकर कोई अंतिम संकेत सामने नहीं आया है।
कांग्रेस की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन को मजबूत किया जाए और उन सीटों की पहचान की जाए जहां पार्टी के जीतने की संभावना सबसे ज्यादा है। इसी वजह से आंतरिक सर्वे और जमीनी फीडबैक को अहम माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव के नतीजों से कांग्रेस को मिली नई उम्मीद
पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में छह सीटें जीती थीं। पार्टी का वोट प्रतिशत भी बढ़ा था। इन नतीजों के बाद कांग्रेस को राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने की उम्मीद दिखाई दे रही है।
पार्टी दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं सहित अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को ध्यान में रखकर संगठन को मजबूत करने में जुटी है। महिला और युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कांग्रेस-सपा गठबंधन पर टिकी नजरें, आगे की रणनीति होगी अहम
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में कितनी सीटें मिलती हैं और किन क्षेत्रों में उसे चुनाव लड़ने का मौका मिलता है। 150 सीटों की सूची को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल पार्टी सीटवार आकलन के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है।
अब सबकी नजर प्रियंका गांधी की अगली बैठक और रणनीति कमेटी की रिपोर्ट पर रहेगी। इसके बाद ही कांग्रेस की सीटों को लेकर आगे की रणनीति और सपा के साथ बातचीत की दिशा ज्यादा साफ हो सकेगी।
