National Security Guard: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार ने हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्रस्तावित जेड-प्लस सुरक्षा को अपनाने से इनकार कर दिया है। यह सुरक्षा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा प्रदान की जानी थी और इसका प्रस्ताव सुरक्षा आकलन के आधार पर दिया गया था। पवार ने इस सुरक्षा प्रस्ताव को लेकर संदेह जताया है, जिससे यह मामला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।शरद पवार ने जेड-प्लस सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता और संदेह व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह सुरक्षा उनके बारे में प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करने का एक साधन हो सकता है, विशेषकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नजदीक होने के कारण। पवार ने इसे जासूसी का एक तरीका मानते हुए इस पर तंज कसा है। उनके इस बयान से सुरक्षा प्रबंधों की वास्तविक मंशा और राजनीति पर सवाल उठते हैं।
केंद्र सरकार की सुरक्षा प्रबंध और पवार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार ने बुधवार को शरद पवार को जेड-प्लस सुरक्षा देने की घोषणा की थी, जो भारतीय सुरक्षा तंत्र का उच्चतम स्तर है। इस सुरक्षा में CRPF और स्थानीय पुलिसकर्मियों द्वारा प्रबंधित सुरक्षा व्यवस्था होती है। हालांकि, पवार ने यह सुरक्षा प्रस्ताव मिलने पर हैरानी जताई और इसे राजनीतिक संदर्भ में जासूसी के प्रयास के रूप में देखा।
Z+ कैटगरी में सुरक्षा का स्तर
Z+ कैटगरी की सुरक्षा में एक वीआईपी को 10 से अधिक NSG (National Security Guard) कमांडो मिलते हैं। इसके अलावा, घर की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त CRPF जवान और स्थानीय पुलिसकर्मी भी तैनात होते हैं। कुल मिलाकर, इस कैटगरी में 36 सुरक्षाकर्मी एक वीआईपी की सुरक्षा में लगे होते हैं। यह सुरक्षा स्तर वीआईपी को उनके घर, कार्यालय, राज्य और अन्य राज्यों में यात्रा करते समय मिलती है।
शरद पवार का जेड-प्लस सुरक्षा को ठुकराना केवल सुरक्षा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक बयान भी है। पवार के अनुसार, यह सुरक्षा प्रस्ताव उनके बारे में जानकारी जुटाने का एक साधन हो सकता है, जो कि चुनावी समय के दौरान उन्हें संदिग्ध लगता है। इस तरह के कदम सुरक्षा और राजनीति के बीच की जटिलताओं को उजागर करते हैं और यह दर्शाते हैं कि कैसे राजनीतिक दल और नेता सुरक्षा प्रबंधों को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखते हैं।
