K Kavitha Bail: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश की कड़ी निंदा की है। यह मामला एक शिक्षित महिला को जमानत देने के संबंध में था।
जमानत मिलने से समाज में गलत संदेश जाएगा
हाईकोर्ट ने महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया था, और इसके पीछे का तर्क यह था कि महिला शिक्षित है और उसे जमानत मिलने से समाज में गलत संदेश जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण की निंदा की और इसे असंवेदनशील और भेदभावपूर्ण बताया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की शिक्षा के आधार पर जमानत के अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराने का प्रयास किया और कहा कि जमानत का फैसला व्यक्ति की व्यक्तित्व, अपराध की प्रकृति और अन्य कानूनी मानदंडों पर आधारित होना चाहिए, न कि उसकी शिक्षा पर।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक जुलाई को के. कविता की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक तरफ तो के. कविता के शिक्षित होने की काफी तारीफ की थी, लेकिन वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने कहा था कि के. कविता कोई कमजोर महिला नहीं हैं जो उन्हें धनशोधन विरोधी कानून पीएमएलए की धारा 45 के प्रावधानों के तहत महिलाओं को दी गई छूट का लाभ दिया जाए। कोर्ट ने इसी का हवाला देते हुए कविता की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
