Haryana: हरियाणा के रोहतक में एक मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है, जो मेडिकल कॉलेज का ही पीजी डॉक्टर बताया जा रहा है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 16 अगस्त की शाम को आरोपी युवक ने उसे मेडिकल कैंपस से अगवा कर लिया और फिर रात भर अम्बाला और चंडीगढ़ घुमाता रहा। 17 अगस्त की शाम साढ़े तीन बजे तक आरोपी ने उसे वापस छोड़ा और इस दौरान उसके साथ मारपीट भी की।
पुलिस की कार्रवाई:
पीड़िता ने अपने परिजनों के साथ मिलकर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पीजीआई थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी का नाम मनिंदर कौशिक है और वह एनॉटमी विभाग का पीजी स्टूडेंट है। इस घटना की जांच जारी है और पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
कोलकाता के मामले से जुड़ी चिंताएं:
हाल ही में कोलकाता के एक मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद से डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया है। इस मामले ने चिकित्सा पेशेवरों के बीच सुरक्षा की गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है और कई जगहों पर धरने और हड़ताल की स्थितियाँ उत्पन्न हुई हैं।
देशभर में बढ़ती घटनाएं:
कोलकाता की घटना के बाद से देशभर में डॉक्टरों के साथ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं। हरियाणा के रोहतक में मारपीट की यह घटना भी इसी सन्दर्भ में देखी जा रही है। यूपी, बिहार और अन्य राज्यों में भी चिकित्सकों ने अपनी सुरक्षा की गारंटी की मांग को लेकर धरने और हड़ताल शुरू कर दी है।
मुंबई में हुई नई घटना:
इस बीच, मुंबई के सायन अस्पताल में भी एक महिला डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। 18 अगस्त की सुबह 03:30 बजे के आसपास, मरीज और उसके परिजनों ने महिला डॉक्टर के साथ बदसलूकी की। महिला डॉक्टर ने इस घटना की रिपोर्ट पुलिस को दी है और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
समग्र स्थिति और प्रतिक्रिया:
देशभर में डॉक्टरों के खिलाफ हो रही हिंसा की घटनाएं चिंताजनक हैं और इनसे चिकित्सा पेशेवरों के मनोबल पर असर पड़ रहा है। रोहतक, कोलकाता, और मुंबई की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चिकित्सा क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। सभी स्थानों पर हुई घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन को समय पर और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
