कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने क्रीमी लेयर पर भाजपा सरकार पर उठाए सवाल

  • कांग्रेस अध्यक्ष ने क्रीमी लेयर की अवधारणा पर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने चिंता जताई।
  • भाजपा पर आरक्षण समाप्त करने की कोशिश करने का आरोप।

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने क्रीमी लेयर की अवधारणा को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार क्रीमी लेयर की अवधारणा लाकर अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है और समाज के पहले से विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग को लाभ पहुंचा रही है। खरगे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “क्रीमी लेयर लाकर आप किसे लाभ पहुंचाना चाहते हैं? आप एक तरफ अछूतों को नकार रहे हैं और दूसरी ओर उन्हें दे रहे हैं जिन्होंने हजारों सालों से विशेषाधिकार का आनंद लिया है। मैं इसकी निंदा करता हूं।”

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और खरगे की प्रतिक्रिया

इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने 6:1 बहुमत के साथ निर्णय दिया था कि राज्य सरकारों को अनुसूचित जातियों (एससी) के भीतर उप-वर्गीकृत समुदायों को आरक्षण के लाभ से वंचित करने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि राज्य सरकारों को अनुभवजन्य आंकड़ों के आधार पर उप-वर्गीकृत समुदायों की पहचान करने की अनुमति है। जस्टिस बीआर गवई ने भी सुझाव दिया कि राज्यों को एक नीति विकसित करनी चाहिए जिससे क्रीमी लेयर की पहचान की जा सके और आवश्यकतानुसार आरक्षण का लाभ प्रदान किया जा सके।

इस निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह निर्णय एससी और एसटी समुदायों के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “जब तक छुआ-छूत रहेगी, तब तक आरक्षण होना चाहिए और रहेगा। हम इसके लिए लड़ेंगे।” खरगे ने आरोप लगाया कि भाजपा आरक्षण को खत्म करने की कोशिश कर रही है, सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों का निजीकरण कर रही है, और एससी और एसटी को उच्च-स्तरीय पदों पर नियुक्तियों से वंचित कर रही है।

कांग्रेस की ओर से उठाए गए मुद्दे

खरगे ने यह भी कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आश्चर्यजनक लगा। उनके अनुसार, जो लोग वास्तविक जीवन में अस्पृश्यता का सामना कर रहे हैं, उन्हें क्रीमी लेयर के तहत वर्गीकृत करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जो लोग उच्च पदों पर हैं और भेदभाव का सामना कर रहे हैं, अगर उनके पास पैसा है, तब भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है।” खरगे ने अपील की कि सभी को एकजुट होकर इस निर्णय को मान्यता न दें और यह मामला फिर से न उठे।

भाजपा और संसद पर आरोप

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में क्रीमी लेयर के फैसले को निरस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम इस पर हाथ नहीं डालेंगे, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्रीमी लेयर लागू न हो, उन्हें संसद में एक कानून लाना चाहिए था। इस निर्णय के आने के लगभग 15 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई विधेयक नहीं लाया गया है।”

भाजपा सरकार के खिलाफ एक कड़ी प्रतिक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान क्रीमी लेयर के मुद्दे पर भाजपा सरकार के खिलाफ एक कड़ी प्रतिक्रिया को दर्शाता है। उन्होंने सरकार पर आरक्षण के अधिकारों को कम करने और अनुसूचित जातियों और जनजातियों को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। यह बयान इस बात का संकेत है कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर संघर्षशील रहेगी और एससी और एसटी समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रयास करती रहेगी।

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