मुंबई कॉलेज में हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: बिंदी और तिलक पर भी सवाल

Hijab ban: पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, बिंदी और तिलक पर सवाल

Hijab ban: हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के एक कॉलेज द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के एक हिस्से पर रोक लगा दी है, जिसमें हिजाब, टोपी और बैज पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, नकाब और अन्य प्रतिबंधों पर रोक लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संदेह जताया है। कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार करते हुए यह सवाल उठाया कि क्या संस्थान तिलक और बिंदी लगाने पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने कॉलेज द्वारा लागू किए गए प्रतिबंधों के औचित्य पर सवाल उठाया। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की बेंच ने कॉलेज के प्रतिनिधि से पूछा कि यदि संस्थान धार्मिक पहचान को छिपाना चाहता है, तो क्या वे छात्रों के नाम के बजाय गेट पर नंबर आवंटित करने की सोच रहे हैं ताकि धर्म का पता न चले?

इस मामले की जड़ एक याचिका में है जिसे मुस्लिम छात्रों के समूह ने दायर किया था। इस याचिका में बॉम्बे उच्च न्यायालय के 26 जून के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने एनजी आचार्य और डी.के. मराठे कॉलेज के निर्णय को बरकरार रखा था। इस निर्णय के तहत छात्रों को हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी आदि पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था।

न्यायालय की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि कॉलेज को यह अधिकार नहीं है कि वह छात्रों को उनके परिधान चुनने की स्वतंत्रता से वंचित करे। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि प्रतिबंध लागू नहीं किए जाते तो छात्रों को भगवा शॉल जैसे परिधान पहनने का खतरा हो सकता है।

कॉलेज का दृष्टिकोण

कॉलेज के प्रतिनिधि वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने इस प्रतिबंध को उचित ठहराया, यह कहते हुए कि यदि प्रतिबंध लागू नहीं होते, तो विभिन्न धार्मिक पहचान के प्रतीकों के माध्यम से छात्र कॉलेज में आते।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को उनकी धार्मिक पहचान के साथ स्वतंत्रता से शिक्षण संस्थानों में भाग लेने का अधिकार है। बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों के संदर्भ में भी यह सवाल उठाया गया है कि क्या कॉलेज इस प्रकार के प्रतीकों पर भी प्रतिबंध लगाएगा। यह मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है और इसका अंतिम निर्णय आने तक छात्रों को अपनी धार्मिक पहचान के साथ स्वतंत्रता से शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है।

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