कर्नाटक सरकार ने पश्चिमी घाटों में वन अतिक्रमण हटाने के लिए टास्क फोर्स का गठन

Karnataka: पश्चिमी घाटों में वन अतिक्रमण हटाने के लिए नया टास्क फोर्स

Karnataka: कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य सरकार ने ‘वन और पश्चिमी घाट अतिक्रमण निकासी टास्क फोर्स’ का गठन किया है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी घाट और अन्य घाट क्षेत्रों में अवैध रिसॉर्ट, होम स्टे और अन्य वन अतिक्रमणों को हटाना है। यह टास्क फोर्स प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल के प्रमुख के नेतृत्व में कार्य करेगी और आज से ही अभियान शुरू करेगी।

Karnataka: वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

ईश्वर खंड्रे ने यह निर्णय पश्चिमी घाट क्षेत्र में हाल ही में हुए भूस्खलनों की गंभीरता को देखते हुए लिया है। उनके अनुसार, शिराडी घाट और चारमाडी घाट सहित कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण पहाड़ियां गायब हो रही हैं। इससे पर्यावरणीय संकट पैदा हो रहा है और आने वाली पीढ़ियों को इससे बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

Karnataka: कर्नाटक वन अधिनियम 64ए के तहत कार्रवाई

मंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि 2015 के बाद वन अतिक्रमण से संबंधित सभी मामलों में 64ए (कर्नाटक वन अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जाए। इस धारा के तहत, वन भूमि के अतिक्रमण और अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने के तरीकों से संबंधित मामले निपटाए जाएंगे। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सप्ताह में दो दिन अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर कार्यवाही करें और आदेश जारी करें।

भूस्खलन और अवैज्ञानिक निर्माण पर सख्त कार्रवाई

मंत्री ने यह भी बताया कि पश्चिमी घाट क्षेत्र में सड़कों के उन्नयन और विस्तार के दौरान अवैज्ञानिक तरीके से पहाड़ियों को काटने के कारण भूस्खलन हो रहा है। इस संदर्भ में ठेकेदारों और इंजीनियरों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संजीवनी

ईश्वर खंड्रे ने स्पष्ट किया है कि वन और पश्चिमी घाटों में पर्यावरण संरक्षण के लिए की जा रही यह कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हम अब नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। यह टास्क फोर्स बड़े पैमाने पर जंगलों पर अतिक्रमण करके बनाए गए अवैध रिसॉर्ट और होमस्टे को खाली कराने के साथ-साथ बागानों और इमारतों को भी खाली कराने का कार्य करेगी।

कर्नाटक सरकार की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो पश्चिमी घाटों और उनके वन क्षेत्रों को संरक्षित करने में सहायक होगा।

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