Finance Minister: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में सांसदों से आग्रह किया है कि वे चिकित्सा और जीवन बीमा को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से छूट दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने सांसदों को अपने-अपने राज्यों के वित्त मंत्रियों से संपर्क करने और जीएसटी परिषद में इस मुद्दे को उठाने की सलाह दी है।
जीएसटी व्यवस्था का मौजूदा परिदृश्य
वित्त मंत्री ने राज्यसभा में विनियोग और वित्त विधेयकों पर बहस का जवाब देते हुए कहा कि 2017 में जीएसटी व्यवस्था शुरू होने से पहले, सभी राज्यों द्वारा बीमा प्रीमियम पर कर लगाया जाता था। उन्होंने उल्लेख किया कि जीएसटी परिषद में राज्यों के वित्त मंत्रियों के पास दो-तिहाई मत होते हैं, जबकि केंद्र के पास एक-तिहाई मत होते हैं, जो बीमा प्रीमियम पर सेवा कर की पूर्व व्यवस्था की ओर इशारा करता है।
सांसदों से अपील
निर्मला सीतारमण ने सांसदों से कहा कि यदि वे वास्तव में बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से छूट चाहते हैं और मध्यम वर्ग की मदद करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने-अपने राज्यों के वित्त मंत्रियों को जीएसटी परिषद में इस मुद्दे को उठाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को राजनीतिकरण करने के बजाय सही मंच पर उठाएं और सुनिश्चित करें कि अगली जीएसटी परिषद की बैठक में इस पर विचार किया जाए।
जीएसटी दर युक्तिकरण समिति की बैठक
वित्त मंत्री ने बताया कि अगस्त के अंत में जीएसटी दर युक्तिकरण समिति की बैठक होगी, जिसमें स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर 18% जीएसटी की दर को कम करने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद में सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं, और एकमात्र मुद्दा (लॉटरी से संबंधित) को छोड़कर सभी निर्णय पर सहमति बनी है।
बजट 2024-25 की प्रक्रिया
वित्त मंत्री के जोरदार जवाब के बाद, बजट 2024-25 के लिए संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो गई। राज्यसभा ने संबंधित वित्त विधेयकों को लोकसभा को वापस कर दिया और जम्मू-कश्मीर विनियोग विधेयक को भी निचले सदन को वापस किया।
विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब
सीतारमण ने विपक्ष के इस आरोप का खंडन किया कि बजट मध्यम वर्ग विरोधी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने कोविड के समय के दबाव के बावजूद कर दरों में वृद्धि की है, जबकि भारत ने मध्यम वर्ग पर बोझ को कम करने का प्रयास किया है। उन्होंने नई कर स्लैब व्यवस्था, मानक कटौती में वृद्धि, और पेंशनभोगियों के लिए पारिवारिक पेंशन पर कटौती की वृद्धि के उदाहरण दिए।
आयकर अधिनियम की समीक्षा
वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम की व्यापक समीक्षा के बारे में अपनी बजट घोषणा को याद किया। उन्होंने कहा कि कर अधिकारियों को इसके लिए छह महीने का समय दिया गया है, और यह समय फरवरी 2025 में अगले बजट के साथ मेल खाता है। सीतारमण ने कहा कि सरकार का प्रयास कर व्यवस्था को सरल, समान और आसान बनाने का है।
वित्त मंत्री ने संपूर्ण बजट को विकास, रोजगार सृजन, पूंजी निवेश और राजकोषीय समेकन का संतुलित मिश्रण बताते हुए कहा कि इस वर्ष केंद्रीय बजट में किसी भी क्षेत्र से समझौता किए बिना इन सभी लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास किया गया है।
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