Punjab: पंजाब सरकार ने राज्य में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। राज्य के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के अनुसार, पंजाब में 66 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 4 मेगावाट होगी, कुल मिलाकर 264 मेगावाट का उत्पादन होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राज्य को न केवल स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त होगी, बल्कि इसका पर्यावरणीय प्रभाव भी सकारात्मक रहेगा।
इस परियोजना के माध्यम से हर साल लगभग 390 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, फीडर-लेवल सोलराइजेशन को लागू करने से सालाना ₹136 करोड़ की बचत होने का अनुमान है। यह बचत भविष्य में और बढ़ सकती है, जिससे राज्य की बिजली सब्सिडी में कमी आएगी और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
सौर ऊर्जा के लाभ:
- स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा: सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करती है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है।
- आर्थिक बचत: सौर ऊर्जा परियोजना की मदद से राज्य की बिजली सब्सिडी कम होगी और सालाना ₹136 करोड़ की बचत होने की संभावना है।
- रोजगार सृजन: इस परियोजना के तहत ₹1,056 करोड़ का निवेश होगा, जिससे कुशल और अर्ध-कुशल व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन: सौर ऊर्जा परियोजना से कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से जीवंत किया जाएगा।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्री अमन अरोड़ा और बिजली मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने इस परियोजना के लिए उच्च स्तरीय रणनीतियों पर चर्चा की है। पंजाब की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सकती है और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य को अग्रणी बना सकती है।
इस प्रकार, पंजाब की सौर ऊर्जा परियोजना न केवल ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लाभ सुनिश्चित करेगी, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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