एनजीटी ने बारापुला नाले की सफाई पर एजेंसियों की खिंचाई की: प्रदूषण और जलभराव की समस्या पर उठी चिंताएं

NGT: की बारापुला नाले पर एंजेंसियों की लापरवाही पर खिंचाई"

NGT: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली के बारापुला नाले की सफाई और ड्रेजिंग में लापरवाही पर गंभीर चिंता जताई है। बारापुला नाला, जो दिल्ली के दक्षिण, मध्य और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों से बहते हुए यमुना नदी में मिलता है, दिल्ली के 80% अपशिष्ट जल को नदी में पहुंचाता है, जिससे यमुना में प्रदूषण का बड़ा हिस्सा उत्पन्न होता है।

बारापुला नाले की वर्तमान स्थिति

एनजीटी ने इस नाले की सफाई के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की खिंचाई की है, जिनमें अभी भी कई महत्वपूर्ण हिस्सों की सफाई पूरी नहीं हुई है। एनजीटी ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाएं, जिम्मेदारी तय करें और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। विशेष रूप से, नाले के ए-1 से ए-7 तक के हिस्से की ड्रेजिंग का काम हो चुका है, लेकिन ए-7 से बी तक के अंतिम हिस्से की सफाई अभी भी लंबित है। यह हिस्सा नाले के जलभराव और प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है।

हाल की बाढ़ और जलभराव की घटनाएँ

28 जून को बारापुला नाले ने दक्षिण और मध्य दिल्ली में बाढ़ ला दी थी, जब एक ही दिन में 200 मिमी से अधिक बारिश हुई थी। इस बाढ़ के कारण जंगपुरा, लाजपत नगर, निजामुद्दीन और चिराग दिल्ली जैसे क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हुईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और नागरिकों को कठिनाई का सामना करना पड़ा।

एजेंसियों की जिम्मेदारी पर विवाद

एनजीटी ने कहा है कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा नाले के शुरुआती हिस्से की सफाई की जा रही है, लेकिन यमुना के करीब वाले हिस्से की सफाई के लिए किसी भी एजेंसी ने कदम नहीं उठाया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने कहा है कि उन्हें ए-7 से बी तक के हिस्से की सफाई की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। एनजीटी ने इस पर आपत्ति जताई है कि कोई भी अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है कि किस एजेंसी को इस हिस्से की ड्रेजिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए।

शाहदरा नाले की स्थिति

इस बीच, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने बताया है कि दिल्ली के शाहदरा नाले के सभी पूरक नाले जैसे साहिबाबाद, इंदिरापुरी और बंथला में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) मानक से तीन से चार गुना अधिक पाई गई है। यह उच्च बीओडी अनुपचारित घरेलू अपशिष्टों के कारण है, और यूपीपीसीबी ने इन नालों के किनारे 13 उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

आगे की कार्रवाई

एनजीटी ने मुख्य सचिव को तुरंत हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया है, और इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी। बारापुला नाले की समस्या पर उठ रही चिंताओं और एजेंसियों की लापरवाही के चलते दिल्ली में जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए शीघ्र और प्रभावी उपायों की आवश्यकता है।

NGT: इस स्थिति की गहराई से समीक्षा और त्वरित समाधान की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि दिल्ली के नागरिक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण का आनंद ले सकें।

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