वायनाड में सुरंग सड़क परियोजना: भूस्खलन और पर्यावरणीय खतरे के बीच विवाद

Wayanad: में सुरंग सड़क परियोजना: पर्यावरणीय चिंताओं के बीच विवाद

Wayanad: – वायनाड में हाल ही में आई भूस्खलन त्रासदी के बाद, एक नई विवादास्पद सुरंग सड़क परियोजना पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस परियोजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है कि यह परियोजना पश्चिमी घाटों की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचा सकती है और भूस्खलन के जोखिम को बढ़ा सकती है।

परियोजना का विवरण

वायनाड में प्रस्तावित 6.8 किलोमीटर की सुरंग सड़क, केरल के कोझीकोड और कर्नाटक के मैसूर और बैंगलोर के बीच यातायात की सुगमता का दावा करती है। इस सुरंग की ड्रिलिंग को पश्चिमी घाट के एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र में करने की योजना है, जहां भूस्खलन की हालिया त्रासदी ने क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस परियोजना की लागत 2,149 करोड़ रुपये है और यह केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के तहत कवर की जाएगी।

पर्यावरणीय चिंताएं

वायनाड में इस परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास लंबित है। हालांकि, राज्य सरकार के सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय सकारात्मक प्रतिक्रिया दे चुका है और जल्द ही आधिकारिक पुष्टि की उम्मीद है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इस परियोजना के कारण संवेदनशील पश्चिमी घाट के जैव विविधता और पारंपरिक हाथी गलियारों को नुकसान पहुँच सकता है। विशेषकर, वावुल माला के नीचे से गुजरती सुरंग परियोजना को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यह क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा का अनुभव करता है।

परियोजना पर विवाद

वायनाड में चल रही इस परियोजना पर विवाद बढ़ता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस विशाल परियोजना की पर्यावरणीय, वित्तीय और समाजशास्त्रीय प्रभावों का उचित आकलन किए बिना ही इसे शुरू कर दिया है। वे मानते हैं कि सुरंग निर्माण से सैकड़ों टन चट्टानें गिर सकती हैं, जो पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

स्थानीय प्रतिक्रियाएं

स्थानीय निवासियों और पर्यावरण संगठनों ने इस परियोजना को लेकर अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं। वायनाड प्रकृति संरक्षण समिति के अध्यक्ष एन. बादुशा का कहना है कि परियोजना चूरलमाला के पास मेप्पाडी में समाप्त होगी, जो भारी मानसून वर्षा के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, गाडगिल और कस्तूरीरंगन समितियों ने इसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र और एशियाई हाथियों के आवास के रूप में पहचाना है।

निष्कर्ष

Wayanad: वायनाड की इस सुरंग सड़क परियोजना को लेकर उठे विवाद और पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद, राज्य सरकार परियोजना पर आगे बढ़ने के संकेत दे रही है। यह देखने वाली बात होगी कि क्या पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना की वास्तविकता में क्या बदलाव आता है और क्या स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों की चिंताओं को सरकार उचित ध्यान देगी या नहीं।

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