रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन के जोपोरिज्जिया क्षेत्र में रूस ने एक स्कूल की इमारत पर भीषण बमबारी की है। इस हमले में कम से कम 33 लोगों की मौत होने की खबर है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले की पुष्टि करते हुए इसे युद्ध के सबसे घातक हमलों में से एक बताया है। उनके मुताबिक, स्कूल की इमारत पर कम से कम नौ बम गिराए गए। हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया।
राहत केंद्र को बनाया निशाना, डबल टैप हमले से बढ़ी तबाही
यह हमला जोपोरिज्जिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा इलाके में हुआ। स्थानीय गवर्नर मिखाइलो सेमकिन के मुताबिक, जिस इमारत को निशाना बनाया गया, उसका इस्तेमाल स्कूल के बजाय लोगों को सुरक्षित आश्रय देने और मानवीय सहायता बांटने के लिए किया जा रहा था। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि पहले स्कूल की इमारत पर हमला किया गया और उसके बाद दोबारा बमबारी की गई। इस तरह के हमले को सैन्य भाषा में ‘डबल टैप अटैक’ कहा जाता है। इसमें पहले हमले के बाद राहत और बचाव कार्य के दौरान दोबारा निशाना बनाया जाता है। इस घटना ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेसमेंट में छिपे थे लोग, बमबारी से ढह गई पूरी इमारत
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हमले के समय ज्यादातर लोग इमारत के बेसमेंट में मौजूद थे। इस बेसमेंट को यूरोपीय संघ की सहायता से मजबूत बनाया गया था, ताकि युद्ध के दौरान होने वाले हमलों से लोगों की जान बचाई जा सके। हालांकि, बमों की भीषण ताकत के सामने सुरक्षा व्यवस्था भी टिक नहीं पाई। विस्फोट के कारण इमारत का ढांचा ढह गया और वहां आग लग गई। इस हादसे में अब तक 33 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। वहीं, करीब 50 लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से लापता लोगों की तलाश और मलबे में दबे लोगों को निकालने का अभियान जारी है।
यूरोपीय संघ की मदद से बना था शेल्टर, अब राहत केंद्र के रूप में हो रहा था इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक, इस शेल्टर को यूरोपीय संघ की मदद से पिछले साल तैयार किया गया था। इसका शुरुआती उद्देश्य युद्ध के हालात में भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखना था। इसके लिए स्कूल के बेसमेंट को सुरक्षित स्थान के रूप में विकसित किया गया था। हालांकि, युद्ध तेज होने के बाद इलाके से बड़ी संख्या में नागरिक पलायन कर गए। इसके बाद स्कूल की इमारत का इस्तेमाल प्रशासनिक केंद्र और मानवीय सहायता वितरण केंद्र के रूप में किया जाने लगा। यहां युद्ध प्रभावित लोगों को जरूरी सामान और दूसरी राहत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। ऐसे में इस इमारत पर हमला होने से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है।
रूस के अगले हमले की तैयारी का दावा, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स हो सकते हैं निशाने पर
इस हमले के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस की अगली सैन्य रणनीति को लेकर भी चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों को रूस के एक और बड़े हमले की तैयारी से जुड़ी जानकारी मिली है। उनके मुताबिक, इस बार रूस ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े ठिकानों को निशाना बना सकता है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के कारण पूरी दुनिया का ध्यान अमेरिका की राजनीति पर केंद्रित रहेगा। ऐसे में रूस इस मौके का फायदा उठाकर यूक्रेन में बड़े हमले कर सकता है। फिलहाल यूक्रेन में लगातार बिगड़ते हालात के बीच नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
