UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर INDIA गठबंधन के अंदर अभी सीट बंटवारे की चर्चा चल ही रही थी कि अब स्वामी प्रसाद मौर्य का मुद्दा सामने आ गया है। कांग्रेस चाहती है कि स्वामी प्रसाद मौर्य भी गठबंधन का हिस्सा बनें, लेकिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।
हाल ही में अखिलेश यादव ने साफ कहा था कि सपा के खाते से स्वामी प्रसाद मौर्य को कोई सीट नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद 2 नवंबर को यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं।
स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों से क्यों नाराज हैं अखिलेश यादव?
स्वामी प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी के बीच दूरी की एक बड़ी वजह उनके पुराने बयान माने जा रहे हैं। जनवरी 2023 में उन्होंने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें दलित और महिला विरोधी बताया था। इसके बाद अक्टूबर 2023 में उन्होंने भारत विभाजन के लिए जिन्ना के बजाय हिंदू महासभा को जिम्मेदार ठहराया था।
इसी साल दिवाली के दौरान माता लक्ष्मी को लेकर उनकी टिप्पणी पर भी विवाद हुआ था। फरवरी 2026 में यूजीसी नियमों, ब्राह्मणों और कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर दिए गए बयानों ने भी उन्हें चर्चा में रखा। अक्टूबर 2026 में उन्होंने अखिलेश यादव के पूजा-पाठ को दिखावा बताया। इसके अलावा डिंपल यादव पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी से भी सपा नेतृत्व नाराज बताया जा रहा है।
2027 चुनाव में बागी नेताओं की सीटों पर नजर, ऊंचाहार का नाम चर्चा में
स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर सपा की नाराजगी के पीछे सिर्फ उनके बयान ही नहीं, बल्कि चुनावी समीकरण भी बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि अगर स्वामी INDIA गठबंधन में शामिल होते हैं, तो वह कुछ ऐसी सीटों पर दावा कर सकते हैं, जहां से सपा के बागी नेता चुनाव लड़ सकते हैं।
इनमें रायबरेली की ऊंचाहार सीट का नाम भी चर्चा में है। सपा इस सीट पर अपने बागी नेताओं को चुनाव में हराने की रणनीति बना सकती है। इसके अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी और बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। उनके बेटे को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं।
राजेंद्र पाल गौतम बोले- क्या दोस्तों से मिलना बंद कर दूं?
स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात को लेकर यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि क्या उन्हें अपने दोस्तों से मिलना बंद कर देना चाहिए? उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में लंबे समय से साथ रहे लोग उनके दोस्त हैं और वह उनसे मिलते रहेंगे।
गौतम ने यह भी साफ किया कि मुलाकात और सीटों का बंटवारा दो अलग-अलग विषय हैं। चुनाव आने पर गठबंधन में सीटों को लेकर बातचीत होगी और फैसला सही समय पर लिया जाएगा। वहीं स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि गठबंधन में उनकी जगह को लेकर उन्हें अखिलेश यादव से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक INDIA गठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व में बना है और अंतिम फैसला कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व करेगा।
स्वामी मौर्य पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी साधा निशाना
इस पूरे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव के बारे में इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। वह खुद अखिलेश यादव के नेतृत्व में काम कर चुके हैं। अवधेश प्रसाद ने उनकी टिप्पणियों को छोटी मानसिकता का नतीजा बताया।
वहीं यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि INDIA गठबंधन में कौन शामिल होगा और कौन नहीं, इसका फैसला गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जल्द सामने आएगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों की राय: स्वामी को साथ लेना कांग्रेस के लिए कितना फायदेमंद?
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने अभी तक ऐसा कोई राजनीतिक करिश्मा नहीं किया है, जिससे गठबंधन को बड़ा फायदा हो। उनके मुताबिक, स्वामी की राजनीति में अपने परिवार को स्थापित करने की कोशिश ज्यादा दिखाई देती है।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला का कहना है कि अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच अब तल्खी काफी बढ़ चुकी है। डिंपल यादव पर टिप्पणी के बाद मामला और बिगड़ा है। उन्हें लगता है कि स्वामी को साथ लेने से कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है, क्योंकि बीजेपी इसे सनातन धर्म के विरोध से जोड़कर कांग्रेस के खिलाफ मुद्दा बना सकती है।
INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे पर बढ़ सकती है मुश्किल
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन बनाए रखने की है। उत्तर प्रदेश में सपा कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में अगर कांग्रेस स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने साथ लाती है, तो सीटों के बंटवारे पर विवाद बढ़ सकता है।
खासकर उन सीटों को लेकर टकराव होने की आशंका है, जहां सपा अपने बागी नेताओं के खिलाफ उम्मीदवार उतारना चाहती है। अखिलेश यादव ऐसी सीटों पर समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य की एंट्री INDIA गठबंधन के लिए फायदे से ज्यादा चुनौती बन सकती है।
