प्रयास, संकेत, ममता और स्पर्श विद्यालयों में विशेष शिक्षा
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से प्रदेश में चार श्रेणियों के विशेष विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें शारीरिक रूप से अक्षम बालकों के लिए राजकीय विद्यालय ‘प्रयास’, मूक-बधिर बच्चों के लिए ‘संकेत’, मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त बालक-बालिकाओं के लिए ‘ममता’ और दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ‘स्पर्श’ विद्यालय शामिल हैं।
इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की क्षमता और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष शिक्षण एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
16 विशेष विद्यालयों को मिला ISO प्रमाणन
विशेष विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश के 21 विशेष विद्यालयों में से 16 विद्यालयों को उच्च स्तरीय शिक्षण एवं प्रशिक्षण व्यवस्था और बेहतर कैंपस प्रबंधन के लिए आईएसओ प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
इन विद्यालयों में उच्च प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लासेज की सुविधा भी शुरू की गई है।
दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के निदेशक राजेश कुमार सिंह के अनुसार, प्रदेश सरकार दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 21 विशेष विद्यालयों में 1464 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों की दिव्यांगता और जरूरतों के अनुरूप प्रयास, संकेत, ममता और स्पर्श विद्यालयों में विशेष शिक्षण व्यवस्था की गई है। स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।
सरकार की इन पहलों से दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण, अपनी प्रतिभा निखारने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
