Azam Khan को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, ED की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार

आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इस मामले पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है।

आजम खां की गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सपा नेता

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें शनिवार शाम रामपुर जेल से रिहाई मिली थी। परिवार और समर्थकों को उम्मीद थी कि अब वह जेल से बाहर आ जाएंगे, लेकिन जेल के दरवाजे पर ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पहुंच गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ED की गिरफ्तारी के बाद आजम खां को अपने साथ गाजियाबाद ले जाया गया। रविवार को उन्हें गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने 78 वर्षीय सपा नेता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्हें डासना जेल में शिफ्ट कर दिया गया।

अब आजम खां ने ED की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, यहां भी उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

CJI सूर्यकांत की पीठ ने क्या कहा? इसी हफ्ते हो सकती है सुनवाई

आजम खां की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने सुनवाई की मांग रखी गई थी।

आजम खां की तरफ से पेश हुए वकील निजाम पाशा ने अदालत से मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की अपील की। उन्होंने बताया कि जौहर ट्रस्ट से जुड़े धनशोधन मामले में ED ने आजम खां को गिरफ्तार किया है और विशेष अदालत उन्हें पहले ही न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है।

पीठ ने वकील की दलीलों पर ध्यान दिया, लेकिन याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मामले पर इसी सप्ताह सुनवाई हो सकती है। ऐसे में अब आजम खां को सुप्रीम कोर्ट से मिलने वाली राहत पर सभी की नजरें टिकी हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतें ED ने की कुर्क, 1170 करोड़ है कीमत

आजम खां के खिलाफ ED की कार्रवाई का मुख्य संबंध रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से है। ED ने 28 अक्टूबर को जानकारी दी थी कि धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क किया गया है।

एजेंसी के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है। ED का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया।

जांच एजेंसी ने आजम खां पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में शहरी विकास मंत्री रहते हुए और उत्तर प्रदेश जल निगम में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कथित अनियमितताओं को अंजाम देने में मदद की। इस मामले में ED ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से आजम खां और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ दर्ज 58 FIR के आधार पर धनशोधन का केस दर्ज किया है।

जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का आदेश, 38 इमारतें निशाने पर

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई भी पहले से चल रही है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने जुलाई में यूनिवर्सिटी परिसर में बनी 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपील दायर की थी।

वहीं, ED ने अगस्त में इस मामले से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी और आजम खां से पूछताछ भी की थी। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

आजम खां के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल उनकी नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और ED की रिमांड कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला उनकी आगे की कानूनी लड़ाई के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

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