UP MLC Election Results: बीजेपी ने जीतीं 6 सीटें, सपा के खाते में 5; आकाश अग्रवाल और ध्रुव त्रिपाठी की जीत भी चर्चा में

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक कोटे की 11 सीटों के चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। चुनाव में बीजेपी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें आईं। इन नतीजों में दो निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी चर्चा में रही। आकाश अग्रवाल चुनाव से पहले सपा में शामिल हो गए थे, जबकि ध्रुव त्रिपाठी ने जीत के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया।

बीजेपी ने 2020 की 6 में से 5 सीटें बचाईं

विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने वर्ष 2020 में जीती गई अपनी 6 सीटों में से 5 पर कब्जा बरकरार रखा और एक नई सीट भी हासिल की। वहीं, समाजवादी पार्टी ने अपनी पिछली 3 सीटें बचाने के साथ 2 नई सीटों पर जीत दर्ज की।

शिक्षक कोटे की 6 सीटों में से बीजेपी ने 4 और सपा ने 2 सीटें जीतीं। वहीं, स्नातक कोटे की 5 सीटों में बीजेपी को 2 और समाजवादी पार्टी को 3 सीटें मिलीं। वाराणसी की स्नातक और शिक्षक सीटों पर सपा की जीत को चुनाव के प्रमुख नतीजों में गिना गया।

ध्रुव त्रिपाठी और आकाश अग्रवाल की जीत रही चर्चा में

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक सीट से आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की। दोनों चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे थे, लेकिन इनके राजनीतिक जुड़ाव को लेकर स्थिति अलग रही। आकाश अग्रवाल चुनाव से पहले सपा में शामिल हो गए थे और पार्टी ने उन्हें आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया। वहीं, ध्रुव त्रिपाठी चुनाव जीतने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए।

इन दोनों के राजनीतिक जुड़ाव को देखते हुए चुनावी नतीजों के विश्लेषण में बीजेपी और सपा के सीटों के आंकड़ों पर भी चर्चा हुई।

गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर 307 वोटों से जीते ध्रुव त्रिपाठी

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर ध्रुव त्रिपाठी ने बेहद करीबी मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को 307 वोटों से हराया। त्रिपाठी को 16,790 मत मिले। दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती के बाद परिणाम घोषित किया गया। यह उनकी लगातार चौथी जीत थी।

वहीं, आगरा-अलीगढ़ शिक्षक सीट पर आकाश अग्रवाल ने बीजेपी के हरिकिशोर तिवारी को 4,263 मतों से पराजित किया।

लखनऊ स्नातक सीट पर कांति सिंह की जीत

लखनऊ स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने बीजेपी के अवनीश कुमार सिंह को 17,225 वोटों से हराया। कांति सिंह को 56,905 मत मिले, जबकि अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट प्राप्त हुए।

कांति सिंह ने वर्ष 2014 में यह सीट निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीती थी। हालांकि, 2020 के चुनाव में उन्हें अवनीश कुमार सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार उन्होंने जीत दर्ज कर सीट पर सपा का कब्जा स्थापित किया।

वाराणसी स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा ने मारी बाजी

वाराणसी स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के केदारनाथ सिंह को हराया। आशुतोष सिन्हा को 52,060 वोट मिले, जबकि केदारनाथ सिंह को 34,766 मत प्राप्त हुए।

दूसरी ओर, मेरठ स्नातक सीट पर बीजेपी के दिनेश कुमार गोयल ने सपा के परमेंद्र सिंह को करीब 13,000 वोटों से हराया। आगरा स्नातक सीट पर बीजेपी के मानवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा के शशांक यादव को 8,856 मतों से पराजित किया। बीजेपी ने इन दोनों सीटों पर अपना पिछला कब्जा बरकरार रखा।

इलाहाबाद-झांसी और वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा का कब्जा बरकरार

इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी के मान सिंह यादव ने बीजेपी के अशोक कुमार राठौर को 27,663 वोटों से हराया। इस जीत के साथ सपा ने अपनी सीट बरकरार रखी।

लखनऊ शिक्षक सीट पर बीजेपी के उमेश द्विवेदी ने सपा के सुशील कुमार को 4,808 मतों से पराजित किया। वहीं, वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के प्रमोद मिश्रा को 4,898 वोटों से हराकर अपनी सीट बचाई।

मेरठ शिक्षक सीट पर बीजेपी के श्रीचंद शर्मा ने सपा के नितिन तोमर को 13,241 वोटों से हराया। बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर बीजेपी के हरि सिंह ढिल्लों ने सपा के दानिश अख्तर को 17,676 मतों से पराजित कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।

11 सीटों के नतीजों में क्या रहा खास?

विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने कुल 6 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि सपा ने 5 सीटों पर सफलता हासिल की। बीजेपी ने अपनी पिछली सीटों में से अधिकांश बचाईं, वहीं समाजवादी पार्टी ने स्नातक और शिक्षक कोटे की कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज कर अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाया। आकाश अग्रवाल और ध्रुव त्रिपाठी की जीत के साथ उनके राजनीतिक जुड़ाव ने भी चुनावी नतीजों को चर्चा में रखा।

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