पहले चक्र से ही उमेश द्विवेदी ने बनाई बढ़त, सभी 14 टेबलों पर रहे आगे
मतगणना के पहले चक्र से ही भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बना ली थी। पहले चक्र में उन्हें 7,189 वोट मिले, जबकि सपा के सुशील कुमार को 3,537 मत प्राप्त हुए। इस तरह उमेश द्विवेदी ने शुरुआत में ही 3,652 वोटों की बढ़त बना ली थी। खास बात यह रही कि पहले चक्र की गिनती में वह सभी 14 टेबलों पर आगे रहे। टेबल नंबर पांच पर उन्हें सबसे ज्यादा 617 वोट मिले, जबकि इसी टेबल पर सुशील कुमार को 213 वोट मिले। यहां भाजपा प्रत्याशी को 404 मतों की बढ़त मिली। टेबल नंबर तीन पर उमेश को 606 और टेबल नंबर 11 पर 574 वोट मिले। वहीं, टेबल नंबर 13 पर दोनों प्रत्याशियों के बीच सबसे कम अंतर रहा। यहां उमेश को 405 और सुशील कुमार को 335 वोट मिले। निर्दलीय प्रत्याशी जगजीवन प्रसाद शुक्ल 760 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
लखनऊ MLC चुनाव में मतगणना पर सवाल, प्रत्याशियों ने लगाए गड़बड़ी के आरोप
लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन की मतगणना के दौरान मंगलवार को कई प्रत्याशियों ने अनियमितताओं के आरोप लगाए। सपा की स्नातक प्रत्याशी कांति सिंह ने फॉर्म 16 में दर्ज मतों की संख्या और मतपेटियों से निकल रहे मतपत्रों के आंकड़ों में अंतर होने का दावा किया। उन्होंने फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए कहा कि प्रत्याशियों को फॉर्म 16 उपलब्ध नहीं कराया गया। इस मामले में अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद सुनवाई नहीं होने का भी आरोप लगाया।
वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी विजय कुमार बंधु ने मतपेटी में खुले मतपत्र मिलने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मतदाता आमतौर पर मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डालता है, ताकि मतदान की गोपनीयता बनी रहे। ऐसे में बड़ी संख्या में खुले मतपत्र मिलना संदेह पैदा करता है। निर्दलीय प्रत्याशी स्मिता मिश्रा ने भी मतपेटियों के नंबरों में अंतर होने और कुछ पेटियों से निर्धारित संख्या से ज्यादा मतपत्र निकलने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, एक पेटी में 50, दूसरी में 10 और अन्य पेटियों में सात-सात मतपत्र अधिक मिले। राजकीय शिक्षक संघ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष छाया शुक्ला ने भी मतगणना में गड़बड़ी की शिकायत की। हालांकि, ये सभी आरोप प्रत्याशियों की ओर से लगाए गए थे।
वैध और अवैध वोटों को लेकर विवाद, मतगणना केंद्र पर हुई नोकझोंक
शिक्षक निर्वाचन सीट की मतगणना के दौरान शाम करीब 4:30 बजे वैध और अवैध मतों को लेकर विवाद शुरू हो गया। कुछ प्रत्याशियों के एजेंटों ने बैलेट पेपर पर लिखे नंबर में गड़बड़ी का हवाला देते हुए उसे अवैध घोषित करने की मांग की। वहीं, प्रशासनिक अधिकारी संबंधित मतपत्र को वैध मान रहे थे। इसी बात को लेकर मतगणना कर्मचारियों और प्रत्याशियों के एजेंटों के बीच बहस होने लगी। देखते ही देखते मतगणना हॉल में हंगामे की स्थिति बन गई।
विवादित बैलेट पेपर अलग रखा, रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले का इंतजार
विवाद बढ़ने पर एडीएम प्रशासन प्रदीप वर्मा और तहसीलदार सदर अविनाश पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विवादित बैलेट पेपर को रिटर्निंग ऑफिसर की टेबल पर ले जाकर नियमानुसार फैसला करने की बात कही। हालांकि, प्रत्याशी और उनके एजेंट मौके पर ही मतपत्र को वैध या अवैध घोषित करने की मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक चलती रही। इसके बाद विवादित मतपत्र को अलग रख दिया गया और मतगणना आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। इन विवादों के बीच आखिरकार उमेश द्विवेदी ने जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार शिक्षक निर्वाचन सीट अपने नाम कर ली।
