110 किलोमीटर दूर से भी राफेल देखने पहुंचे लोग
वाराणसी के एयर शो का आकर्षण सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा। चंदौली के अलावा आजमगढ़, मऊ और सोनभद्र से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बिहार के कैमूर और रोहतास से भी दर्शक एयर शो देखने आए। कई लोगों ने 60 से 110 किलोमीटर तक का सफर तय किया। किसी ने किराये की गाड़ी ली तो कोई परिवार के साथ सुबह ही गंगा किनारे पहुंच गया, ताकि आसमान में उड़ते लड़ाकू विमानों का नजारा देख सके।
राजघाट पुल बंद होने से लोगों को हुई परेशानी
एयर शो के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजघाट पुल पर सुबह आठ बजे से ही यातायात बंद कर दिया गया। इसके चलते गंगा पार से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, काशी की तरफ के घाटों पर भी एयर शो देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दूसरे दिन यानी 24 अक्टूबर को पहले दिन की तुलना में करीब तीन गुना अधिक भीड़ जुटने का अनुमान लगाया गया था। मौके पर उमड़ी भीड़ ने इस अनुमान को सही साबित किया।
बहादुरपुर से कटेसर तक पांच किलोमीटर में दिखा एयर शो का रोमांच
पहले दिन नमो घाट के सामने अवधूत भगवान राम घाट की तरफ दर्शकों की भीड़ ज्यादा दिखाई दी थी। लेकिन दूसरे दिन बहादुरपुर से कटेसर तक गंगा किनारे बने सभी दर्शक स्थलों पर लोगों की भारी मौजूदगी रही। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सुबह से ही अपनी जगह सुरक्षित करने में जुट गए थे। जैसे ही आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाज गूंजती, लोगों की निगाहें ऊपर उठ जातीं। हर कोई अपने मोबाइल कैमरे में विमानों की उड़ान और उनकी कलाबाजियों को कैद करना चाहता था।
एसपी आकाश पटेल ने बताया कि एयर शो को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई थी। पहले दिन की तुलना में दूसरे दिन करीब तीन गुना ज्यादा लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे।
एयर शो देखने पहुंचीं एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां
वाराणसी एयर शो ने परिवारों को भी साथ में यादगार पल बिताने का मौका दिया। डोमरी में गंगा किनारे एक ऐसा नजारा दिखा, जहां एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां लड़ाकू विमानों की उड़ान देखने पहुंचीं। मंजू देवी अपने बेटे, बहू और पोता-पोती के साथ एयर शो देखने आई थीं। परिवार के सभी सदस्यों ने साथ बैठकर आसमान में विमानों की कलाबाजियां देखीं और इस पल को यादगार बनाया।
आमतौर पर घर के बड़े, युवा और बच्चे अपने-अपने कामों में व्यस्त रहते हैं। लेकिन इस एयर शो ने सभी को एक साथ समय बिताने का मौका दिया। मंजू देवी के लिए यह अनुभव खास रहा, क्योंकि परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ इस रोमांचक नजारे का आनंद लिया।
80 साल के अजीमुल्लाह ने भी देखी लड़ाकू विमानों की उड़ान
एयर शो का उत्साह बुजुर्गों में भी कम नहीं दिखा। 80 साल के अजीमुल्लाह शनिवार को विमानों की उड़ान देखने के लिए डोमरी पहुंचे। वह एक दिन पहले ही वहां आ गए थे और रात अपने रिश्तेदार के घर बिताई। सुबह होते ही वह एयर शो देखने के लिए गंगा किनारे पहुंच गए।
अजीमुल्लाह ने कहा, ”मोदी नहीं होते तो हमार ई इच्छा पूरी नहीं होती।” उम्र बढ़ने के साथ उनकी आंखों की रोशनी कमजोर हो गई है और दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। इसके बावजूद लड़ाकू विमानों की एक झलक देखने की उनकी इच्छा उन्हें यहां तक खींच लाई। उनके लिए यह सिर्फ एयर शो देखना नहीं, बल्कि लंबे समय से मन में बसी एक हसरत पूरी होने जैसा था।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले मणिकर्णिका घाट पर सुरक्षा सख्त
रविवार को एयर शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिसकर्मियों की तैनाती शनिवार को ही कर दी गई थी। सुरक्षा कारणों से मणिकर्णिका घाट की छत पर शनिवार से शवदाह बंद कर दिया गया। रविवार को भी यहां शवदाह नहीं होना था।
घाटों पर लोगों की जांच के बाद ही पैदल जाने की अनुमति दी जा रही थी। स्थानीय लोगों को भी वाहन ले जाने के लिए आधार कार्ड पर पता दिखाना पड़ रहा था। प्रशासन ने रविवार के लिए भी इसी व्यवस्था को लागू रखने की तैयारी की।
सिंधिया घाट पर इतनी भीड़ कि आगे बढ़ना हुआ मुश्किल
मणिकर्णिका घाट से आगे सिंधिया घाट पर भी एयर शो देखने के लिए भारी भीड़ जमा हुई। यहां से राजघाट की तरफ का नजारा साफ दिखाई देता है। इसी वजह से घाट की सीढ़ियों से लेकर ऊपर तक लोग खड़े नजर आए। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोगों के लिए एक तरफ से दूसरी तरफ जाना भी मुश्किल हो गया।
आमतौर पर लोग यहां अंतिम संस्कार के बाद स्नान करके घर लौटते हैं, लेकिन एयर शो के दौरान घाट का नजारा पूरी तरह बदल गया। हर कोई आसमान में उड़ते विमानों को देखने के लिए अपनी जगह पर डटा रहा।
सतुआ बाबा ने आश्रम की बालकनी से देखा एयर शो
गंगा किनारे उमड़ी भीड़ को देखते हुए सतुआ बाबा नमो घाट नहीं गए। उन्होंने मणिकर्णिका घाट स्थित अपने आश्रम की बालकनी से ही एयर शो का आनंद लिया। वहीं, बटुक आश्रम की छत से भी लोग लड़ाकू विमानों की उड़ान देखते नजर आए। घाटों के आसपास बने घरों की छतों, खिड़कियों और बालकनियों में भी लोगों की भीड़ दिखाई दी।
मणिकर्णिका घाट पर चिताओं के धुएं के कारण आसपास के लोग अक्सर अपनी खिड़कियां बंद रखते हैं। लेकिन एयर शो देखने के लिए महिलाएं और लड़कियां खिड़कियों पर नजर आईं, जबकि बच्चे छतों पर खड़े होकर विमानों को देखते रहे।
इंटरस्टेलर के म्यूजिक और एलन वॉकर के गाने ने बढ़ाया रोमांच
नमो घाट पर एयर शो के दौरान लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों की उड़ान के साथ संगीत ने भी दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। हॉलीवुड फिल्म ‘इंटरस्टेलर’ के बैकग्राउंड म्यूजिक ने कार्यक्रम को सिनेमाई अंदाज दिया। वहीं, एलन वॉकर के गाने ‘हेडलाइट’ की धुन पर हेलिकॉप्टरों की सलामी ने लोगों का ध्यान खींचा।
देशभक्ति गीतों के साथ बॉलीवुड के गानों ने भी माहौल को जोश से भर दिया। ‘मेरी हीर आसमानी’ गीत के दौरान लड़ाकू विमानों की गर्जना ने दर्शकों को रोमांचित किया। वहीं, दलेर मेहंदी के ‘दंगल-दंगल’ गाने पर लोगों का उत्साह और बढ़ गया। भारतीय वायुसेना की सारंग टीम ने हवा में दिल का आकार बनाकर अपने करतबों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मणिकर्णिका घाट पर चिताओं के धुएं के बीच दिखा वायुसेना का पराक्रम
शनिवार को मणिकर्णिका घाट पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसमें जीवन और मृत्यु के बीच आधुनिक भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन नजर आया। एक तरफ चिताओं की लपटें थीं और अपनों को खोने का गम लिए लोग अंतिम विदाई दे रहे थे। दूसरी तरफ गंगा के आसमान में राफेल, सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान गर्जना करते हुए उड़ रहे थे।
अंतिम संस्कार में शामिल कई लोगों की निगाहें भी कुछ पल के लिए आसमान की ओर उठ गईं। गमगीन माहौल के बीच विमानों की उड़ान ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। सबसे ज्यादा भीड़ सिंधिया घाट पर दिखाई दी। सदियों से अंतिम संस्कार का साक्षी रहा मणिकर्णिका घाट उस दिन आधुनिक भारत की सैन्य शक्ति का नजारा भी देख रहा था। घाटों की प्राचीनता और आसमान में उड़ते विमानों का दृश्य काशी की अनूठी पहचान को सामने ला रहा था।
बनारसी अंदाज में लोगों ने की राफेल की गर्जना की चर्चा
वाराणसी में एयर शो के दौरान लोगों का बनारसी अंदाज भी देखने को मिला। मणिकर्णिका घाट पर राफेल की कम ऊंचाई पर उड़ान और उसकी तेज आवाज को लेकर स्थानीय लोग आपस में चर्चा करते नजर आए। एक व्यक्ति ने बनारसी अंदाज में कहा, ”बहुत नीचे से जात ह राफेल, सुत्तल अदमी डेरा के उठ जाई।”
लोगों की इस तरह की प्रतिक्रियाओं से साफ था कि एयर शो ने काशीवासियों के बीच खास उत्साह पैदा किया। गंगा किनारे जुटी भारी भीड़, लड़ाकू विमानों की गर्जना और हेलिकॉप्टरों के करतबों ने वाराणसी के इस आयोजन को यादगार बना दिया।
