नागरिक संतुष्टि ही सरकारी कर्मचारियों का रिपोर्ट कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी समस्या को जानबूझकर लटकाना या जानकारी की कमी के कारण उसका समाधान नहीं कर पाना, दोनों ही प्रशासन के लिए गंभीर विषय हैं। उन्होंने जोर दिया कि सरकारी नौकरी में सिर्फ अपने अधिकारों और प्रमोशन की चिंता करना काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदारियों को भी पूरी गंभीरता से निभाना होगा। किसी बुजुर्ग, महिला, किसान, युवा या जरूरतमंद को सरकारी कार्यालय से निराश लौटना पड़े, तो यह लोक सेवा के उद्देश्य के खिलाफ है। योगी ने कहा कि बार-बार शिकायत करने वालों से अलग एक सामान्य नागरिक की वास्तविक परेशानी को समझना और उसका समाधान करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
एआई और डिजिटल तकनीक से बदलेगा सरकारी कामकाज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक के कारण शासन का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए तैयार करना जरूरी है। सीएम ने क्षमता विकास आयोग से अपील की कि उत्तर प्रदेश प्रशासनिक एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक से सरकारी प्रक्रियाएं आसान और फैसले बेहतर हो सकते हैं, लेकिन जनता के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव सबसे जरूरी है।
सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने पर जोर
योगी ने कहा कि सरकारी विभागों में ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका में सही व्यक्ति की तैनाती की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाना चाहिए। अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कामकाज और बेहतर प्रदर्शन को उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में भी काम होना चाहिए। इससे कर्मचारियों की योग्यता के अनुसार जिम्मेदारियां तय करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर होना जितना नुकसानदायक है, उतना ही खतरनाक किसी लापरवाह कर्मचारी का उसी पद पर बने रहना भी है। इसलिए कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ उनके काम का नियमित मूल्यांकन भी जरूरी है।
पंचायतों और नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्थानीय निकायों को मजबूत, जवाबदेह और जनता के प्रति जिम्मेदार बनाना होगा। पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इनकी कार्यक्षमता बेहतर होगी, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंचेगा।
यूपी के 19.26 लाख कर्मचारी कर्मयोगी पोर्टल से जुड़े
योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी सरकारी कामकाज की संस्कृति बदलने का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश में 19.26 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रदेश के 334 से ज्यादा प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि सरकारी कामकाज कितना आसान हुआ और जनता को कितनी बेहतर सेवा मिली।
सड़क निर्माण का उदाहरण देकर समझाई अधिकारियों की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए बताया कि एक सड़क को दो लेन से चार लेन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभियंताओं ने सड़क को जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा बना दिया। इससे आसपास रहने वाले लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ। शिकायत मिलने पर वह खुद मौके पर पहुंचे और सड़क को लोगों की जरूरत के मुताबिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री और नियुक्ति पत्र मिलने से कोई अधिकारी या अभियंता सक्षम नहीं बन जाता। काम की व्यावहारिक समझ, नई तकनीक का ज्ञान और जनता की जरूरतों के अनुसार फैसले लेने की क्षमता भी जरूरी है। इसी सोच के साथ प्रदेश में क्षमता विकास को मजबूत करने और उपाम को आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
