International News: इजरायल को मध्य पूर्व के सबसे ताकतवर सैन्य देशों में गिना जाता है। उसकी आधुनिक वायुसेना, मिसाइल रक्षा प्रणाली और खुफिया नेटवर्क उसे क्षेत्र में मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं। इसके बावजूद अमेरिका के साथ उसके गहरे सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक संबंध इजरायल के बड़े फैसलों को प्रभावित करते हैं। ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी अमेरिकी रुख की अहम भूमिका रहती है।
चुनावी राजनीति और अमेरिका की रणनीतिक चिंताएं
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संबंध मध्य पूर्व की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में अमेरिका को अपने क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा के साथ-साथ व्यापक युद्ध के जोखिम पर भी विचार करना पड़ता है।
मध्य पूर्व में बड़ा सैन्य टकराव तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, अमेरिका को अपने सैनिकों और क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों की सुरक्षा की चिंता भी रहती है।
अमेरिकी प्रशासन के लिए किसी बड़े संघर्ष को सीमित रखना रणनीतिक और घरेलू राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष हमले को रोकने के पीछे चुनावी राजनीति को मुख्य कारण बताने के लिए संबंधित घटनाक्रम और आधिकारिक बयानों की पुष्टि जरूरी है।
अमेरिकी हथियारों पर निर्भरता इजरायल की बड़ी जरूरत
इजरायल की सैन्य क्षमता के पीछे अमेरिकी सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल को सैन्य सहायता देता आया है। इस सहायता से इजरायल आधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों, मिसाइल रक्षा प्रणालियों और अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद कर सकता है।
दोनों देशों के बीच 2019 से 2028 तक के लिए हुए समझौते के तहत अमेरिका ने 38 अरब डॉलर की सैन्य सहायता का ढांचा तय किया था। इसमें 33 अरब डॉलर की विदेशी सैन्य वित्तपोषण सहायता और 5 अरब डॉलर मिसाइल रक्षा सहयोग के लिए निर्धारित हैं।
आधुनिक सैन्य अभियानों में केवल हथियार होना पर्याप्त नहीं होता। उनके रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स, गोला-बारूद और तकनीकी सहयोग की निरंतर उपलब्धता भी जरूरी होती है। अमेरिकी रक्षा उद्योग और सैन्य सहयोग इजरायल की इन जरूरतों को पूरा करने में अहम योगदान देते हैं।
