जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरव दास ने जंतर-मंतर पर बिना अनुमति जाने और वहां प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। जंतर-मंतर को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद वहां प्रदर्शन के लिए अनुमति जरूरी है। इसी मामले में पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में लिया था।
CJP का कहना है कि दोनों नेता वहां सिर्फ राष्ट्रध्वज फहराने और नारे लगाने गए थे। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके नेताओं को जेल में रखने की कोई ठोस कानूनी वजह नहीं है।
जमानत की तैयारी के बावजूद दो दिन और जेल में रहेंगे CJP नेता
दोनों नेताओं को कोर्ट की कार्रवाई के लिए मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। CJP की कानूनी टीम ने जमानत से जुड़े जरूरी दस्तावेज और जमानतदारों को पेश करते हुए उनकी रिहाई की मांग की। बताया गया कि पहले जिस समय दोनों को पकड़ा गया था, उस वक्त उनके जमानतदार मौजूद नहीं थे।
हालांकि, जमानत की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश के बावजूद मजिस्ट्रेट ने दोनों की हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। सुनवाई के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास को वापस तिहाड़ जेल ले जाया गया। अब उन्हें बुधवार को फिर पेश किया जाएगा।
CJP ने पुलिस और प्रशासन पर सुनवाई में देरी का आरोप लगाया
कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन सुनवाई में देरी करके दोनों नेताओं की रिहाई को टाल रहे हैं। पार्टी नेता अभिजीत दीपके का कहना है कि प्रशासन के पास उन्हें जेल में रखने की कोई कानूनी वजह नहीं है और इसके बावजूद अलग-अलग तरीकों से उनकी रिहाई में बाधा डाली जा रही है।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी आरोप लगाया कि दोपहर में होने वाली सुनवाई को पुलिस और अधिकारियों ने कई घंटों तक टाल दिया। पार्टी ने इस देरी पर नाराजगी जताई है। हालांकि, ये आरोप CJP की ओर से लगाए गए हैं।
जेल में बंद साथियों को याद कर भावुक हुए CJP संस्थापक
दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने से कुछ देर पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर उनके लिए एक भावुक संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि दोनों को जेल में रहते हुए छह दिन हो गए हैं और उन्हें उनकी बहुत याद आ रही है।
दीपके ने अपने संदेश में लिखा कि पिछले तीन महीनों से उन्हें दोनों की दिन-रात आने वाली परेशानियों से जुड़ी कॉल और संदेशों की आदत हो गई थी। उन्होंने कहा कि कई बार वह इन कॉल और संदेशों को टाल देते थे, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि आशुतोष और सौरव उनके बिना भी अपनी समस्याएं संभाल लेंगे।
फिलहाल दोनों नेताओं को दो दिन और जेल में रहना होगा। इस मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगली सुनवाई में दोनों को जमानत मिलती है या उनकी हिरासत को लेकर कोई नया आदेश आता है।
