मणिपुर गोलीबारी में दो लोगों की मौत, कई घायल और तीन लापता
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, यह पूरा मामला इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास हुई गोलीबारी से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार सुबह जलावन की लकड़ी लेने पहाड़ियों की ओर गए लोगों के एक समूह पर संदिग्ध उग्रवादियों ने कथित तौर पर हमला कर दिया। गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद तीन लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है।
बताया गया कि करीब 16 लोगों का समूह सुबह लगभग 7 बजे अपने गांव के पास की पहाड़ियों में लकड़ी लेने गया था। इसी दौरान उन पर हमला हुआ। घटना इंफाल पूर्व जिले के नोंगशुम गांव के पास कांगपोकपी जिले के इलाके में हुई। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, लापता लोगों की तलाश की जा रही थी।
मणिपुर हिंसा में मृतकों की पहचान, अरुबम रोनिल और लैरेनलाकपम इनओबी की गई मौत
गोलीबारी में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान अरुबम रोनिल और लैरेनलाकपम इनओबी के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, रोनिल की उम्र 35 साल और इनओबी की उम्र 51 साल थी। दोनों की मौत के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया।
हमले की खबर गांव और आसपास के इलाकों में पहुंचने के बाद लोग विरोध जताने के लिए इंफाल में मुख्यमंत्री आवास की ओर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सुरक्षा व्यवस्था और हमले में लोगों की मौत को लेकर था। हालांकि, गोलीबारी के पीछे कौन था और हमलावरों की पहचान क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
दो लोगों की हत्या के विरोध में प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के आवास के बाहर पहुंचे। वहां उन्होंने शव को गेट के बाहर रख दिया। अचानक हुए इस प्रदर्शन से इलाके में तनाव बढ़ गया। भीड़ को हटाने और हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।
इसके बाद शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) ले जाया गया। घटना के समय मुख्यमंत्री अपने आवास पर मौजूद थे या नहीं, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी। प्रशासन की ओर से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही थी।
मणिपुर में पहले भी हिंसा, पहाड़ी जिलों में तनाव बरकरार
मणिपुर में ताजा गोलीबारी की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य के पहाड़ी जिलों में पहले से ही तनाव बना हुआ है। इससे पहले कामजोंग जिले के चस्साद गांव में कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की खबर आई थी। उस घटना में भी एक व्यक्ति की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
लगातार सामने आ रही हिंसा की घटनाओं ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ताजा हमले के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और मुख्यमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल, गोलीबारी के मामले में हमलावरों की पहचान, लापता लोगों की स्थिति और घटना के पीछे की वजहों को लेकर जांच की जानकारी का इंतजार है।
