Mayawati: बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को एक बयान जारी करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस को आरक्षण विरोधी बताते हुए भविष्य में इन दलों के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन से इन्कार किया। मायावती ने इन दलों की नीतियों और उनके इतिहास पर सवाल उठाते हुए इसे अनुसूचित जाति और जनजाति के हितों के खिलाफ बताया।
जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस पर हमला
मायावती ने कांग्रेस से सवाल किया कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने जातीय जनगणना क्यों नहीं करवाई। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस संविधान और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रति सम्मान दिखाती, तो जातीय जनगणना को लागू करती। मायावती ने कहा कि कांग्रेस और सपा की चाल और चरित्र को लेकर दलितों को सजग रहना चाहिए।
संविधान सम्मान समारोह पर टिप्पणी
बसपा प्रमुख ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि शनिवार को प्रयागराज में आयोजित संविधान सम्मान समारोह के बावजूद कांग्रेस ने बाबा साहेब अंबेडकर को उनके जीवन काल में भारतरत्न से सम्मानित नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कांशीराम जी के निधन पर भी कोई राष्ट्रीय शोक नहीं घोषित किया। मायावती ने इसे कांग्रेस की दोगली सोच और चरित्र का उदाहरण बताया और कहा कि इस प्रकार की नीति दलित समुदाय के लिए सही नहीं है।
आरक्षण की साजिश के खिलाफ चेतावनी
मायावती ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति को मिले आरक्षण में वर्गीकरण और क्रीमीलेयर के जरिए इसे निष्प्रभावी बनाने की साजिश चल रही है। उन्होंने कांग्रेस, सपा और भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह इन दलों की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन दलों की चुप्पी आरक्षण के खिलाफ उनकी वास्तविक नीति को उजागर करती है।
गठबंधन से इन्कार और आत्मनिर्भरता की सलाह
मायावती ने स्पष्ट किया कि सपा और कांग्रेस जैसी आरक्षण विरोधी पार्टियों के साथ किसी भी चुनाव में गठबंधन करना अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के हित में नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इन दलों के साथ गठबंधन से बचना चाहिए और अपने दम पर खड़ा होना चाहिए। मायावती ने बीएसपी को इन दलों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी और अपने राजनीतिक दृष्टिकोण पर जोर दिया।
मायावती का यह बयान सपा और कांग्रेस के खिलाफ उनकी आरक्षण नीति और जातीय जनगणना को लेकर उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। उनके आलोचनात्मक टिप्पणियों के जरिए एक बार फिर उन्होंने दलित और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर अपनी सख्त राय पेश की है। आगामी चुनावों के संदर्भ में मायावती ने अपने और अपनी पार्टी के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए आरक्षण के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की समझौता न करने की बात की है।
