दिल्ली में करोड़ों का घोटाला: एसीबी ने 85 डिलीवरी का ब्योरा मांगा

Delhi: में करोड़ों का घोटाला: एसीबी ने 85 डिलीवरी का ब्योरा मांगा

Delhi: दिल्ली में हाल ही में एक बड़ा घोटाला सामने आया है जिसमें राज्य औषधि नियंत्रण विभाग और सीमा शुल्क विभाग की संलिप्तता का आरोप है। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने इन विभागों को नोटिस भेजकर 85 निर्यात डिलीवरी के रिकॉर्ड की मांग की है। यह कदम जीएसटी अधिकारी बबीता शर्मा और उनके छह सहयोगियों की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जिन पर ₹718 करोड़ के चालान बनाने का आरोप है।

घोटाले की पृष्ठभूमि

एसीबी के अनुसार, आरोपियों ने दवाओं के खरीद बिलों में जालसाजी की और व्यापार तथा कर विभाग से जीएसटी रिफंड प्राप्त करने के लिए ड्रग्स कंट्रोल विभाग और सीमा शुल्क अधिकारियों से मंजूरी प्राप्त की। जांच में पता चला है कि बबीता शर्मा ने वित्त वर्ष 2021-22 में 85 निर्यात डिलीवरी के रिकॉर्ड को प्रमाणित किया था, जो अब विवादित हो गए हैं।

संदिग्ध गतिविधियां और गिरफ्तारी

Delhi: एसीबी प्रमुख संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि शर्मा अपने सहयोगियों राज सिंह सैनी, नरेंद्र कुमार सैनी और मुकेश सैनी के साथ मिलकर फर्जी रिफंड मंजूर कर रही थीं। इन लोगों ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के निर्यात में 96 से अधिक फर्जी कंपनियां चलाईं और ₹54 करोड़ से अधिक का रिफंड प्राप्त किया। इन कंपनियों के मालिक खुद को दवा और चिकित्सा उपकरण फर्मों के मालिक के रूप में पेश करते थे और कथित तौर पर अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान आदि देशों को दवाइयों का निर्यात करके जाली खरीद बिल बनाते थे।

जांच और सबूत

एसीबी अधिकारियों ने खुलासा किया कि आरोपियों ने जाली ई-वे बिल और रसीदें बनाने के लिए ट्रांसपोर्टरों की मदद भी ली। पिछले हफ्ते पुलिस ने दो ट्रांसपोर्टरों को गिरफ्तार किया था। जांचकर्ताओं का कहना है कि तीनों सैनी वास्तव में दवा भेजे बिना ही औषधि नियंत्रण विभाग से मंजूरी प्राप्त करने में सफल रहे।

अन्य गिरफ्तारियां और विभागीय लापरवाही

जांच में कुछ अन्य फर्जी फर्मों के मालिक मनोज गोयल को भी गिरफ्तार किया गया है। एसीबी अधिकारियों ने पाया कि व्यापार और कर विभाग ने 500 से अधिक गैर-मौजूद फर्मों को जीएसटी रिफंड का दावा करने की अनुमति दी, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में करोड़ों का रिफंड प्राप्त किया। इन फर्मों के पास कोई वास्तविक कार्यालय, डीलर या आधार सत्यापन नहीं था, लेकिन फिर भी उन्हें संचालन की अनुमति दी गई।

समाप्ति और निष्कर्ष

जीएसटी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बबीता शर्मा और उनके सहयोगी इन फर्जी फर्मों में शामिल हैं और सैनी अकेले 96 फर्मों के मालिक हैं। इस घोटाले में कई विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है, जिससे इन कंपनियों की बिक्री और खरीद की वास्तविक श्रृंखला का पता लगाना मुश्किल हो गया है। एसीबी की जांच अब भी जारी है और इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता है।

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