उद्धव ठाकरे से अलग होना शिवसेना को बचाने के लिए जरूरी था: महाराष्ट्र CM एकनाथ शिंदे

Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 2022 में उद्धव ठाकरे से अलग होने के अपने फैसले को सही ठहराया है। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर वह उद्धव ठाकरे के साथ रहते तो शिवसेना पार्टी टूट जाती और पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘धनुषबाण’ भी नष्ट हो सकता था। शिंदे ने यह भी दावा किया कि उनका फैसला पार्टी और उसके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था।

यह बयान उस समय दिया गया है जब शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना से बगावत कर अपनी खुद की सरकार बनाई थी, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आया था। शिंदे ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि इससे पार्टी को न केवल संरक्षित किया गया बल्कि उसकी पहचान भी बरकरार रखी गई।

कांग्रेस और एनसीपी जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन कर

शिंदे ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे ने शिवसेना को उसकी मूल विचारधारा से दूर ले जाकर कांग्रेस और एनसीपी जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन कर लिया था, जो शिवसेना के पारंपरिक समर्थकों के लिए अस्वीकार्य था। इसी कारण उन्होंने पार्टी की वास्तविक पहचान को बचाने के लिए यह कठिन निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस कदम से पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘धनुषबाण’ को भी बचाया जा सका।

कई नेता और विधायक शिंदे के पक्ष में आ गए थे

शिंदे का यह बयान उस समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में कई चुनौतियाँ और बदलाव देखे जा रहे हैं। उनके इस कदम के बाद शिवसेना में विभाजन हो गया था, और उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई थी। इस कदम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े कर दिए थे, क्योंकि पार्टी के कई नेता और विधायक शिंदे के पक्ष में आ गए थे।

शिंदे का यह बयान शिवसेना के पारंपरिक वोट बैंक और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने के लिए भी है कि उन्होंने पार्टी की वैचारिकता और उसकी पहचान को बचाने के लिए यह कदम उठाया था। वहीं, उद्धव ठाकरे और उनके समर्थक शिंदे पर आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी को विभाजित किया।

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