Kolkata: सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच मंगलवार 20 अगस्त को इस मामले की सुनवाई करेगी।
सीबीआई जांच:
सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की घटना के बाद, इस मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पास सौंप दी गई है। सीबीआई ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और दोषियों को पकड़ने के लिए तेजी से कार्रवाई कर रही है।
डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन:
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए इस जघन्य अपराध के बाद, देश भर में डॉक्टरों द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी है। चिकित्सकों ने अपने कामकाजी माहौल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कोलकाता पुलिस की धारा 163 लागू करने की घोषणा:
इस बीच, कोलकाता पुलिस ने आरजी कर अस्पताल के आसपास धारा 163 लागू कर दी है। 18 अगस्त से अगले 7 दिनों के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत यह धारा लागू की गई है। इस अवधि में अस्पताल के आसपास किसी भी प्रकार की सभा, धरना या रैली की अनुमति नहीं होगी। पुलिस ने इस निर्णय की वजह सुरक्षा की स्थिति को नियंत्रित करना बताया है।
पश्चिम बंगाल सरकार की पहल:
पश्चिम बंगाल सरकार ने महिला डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई पहल की है। मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अलपन बंदोपाध्याय ने “रातिरेर साथी” नामक पहल की घोषणा की है, जिसके तहत महिला डॉक्टरों की रात की ड्यूटी से परहेज करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो महिलाओं के प्रति संवेदनशील होंगे।
घटना की संक्षिप्त जानकारी:
9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के परिसर में एक ट्रेनी महिला डॉक्टर का शव रहस्यमय परिस्थितियों में मिला था। वह पोस्ट ग्रेजुएट के दूसरे वर्ष की छात्रा थी और चेस्ट मेडिसिन विभाग में ड्यूटी करती थी। उसका शव इमरजेंसी बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर मिला था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं।
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई इस घिनौनी घटना ने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और सीबीआई की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं, जबकि सरकार और पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सक्रिय हैं। डॉक्टरों और समाज का गुस्सा इस बात का संकेत है कि समय रहते उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
