J&K: जम्मू-कश्मीर एक दशक बाद एक बार फिर विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है। 18 सितंबर से शुरू होने वाले इस चुनावी दंगल में तीन चरणों में 90 विधानसभा सीटों के लिए मुकाबला होगा। यह चुनाव 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और जम्मू क्षेत्र में आतंकी हमलों में वृद्धि के बाद हो रहा है, जिसने इस चुनाव को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
J&K: चुनाव की तारीखें और चरण
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 18 सितंबर को 24 सीटों पर, दूसरा चरण 25 सितंबर को 26 सीटों पर और तीसरा चरण 1 अक्टूबर को 40 सीटों पर होगा। चुनाव परिणाम 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
J&K: 2014 के चुनावों से तुलना
पिछला विधानसभा चुनाव 2014 में हुआ था, जिसमें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 सीटें जीती थीं, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। हालांकि, तीन साल बाद, BJP ने समर्थन वापस ले लिया, जिससे राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।
परिसीमन के बाद की नई तस्वीर
2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और नए परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर की चुनावी राजनीति में बड़े बदलाव हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 87 से बढ़कर 90 हो गई है, जिसमें जम्मू क्षेत्र में 43 और कश्मीर में 47 सीटें हैं।
नए दल और बदलते समीकरण
अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, दो नई क्षेत्रीय पार्टियों का उदय हुआ है। पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व में ‘अपनी पार्टी’ और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी’। हालांकि, इन पार्टियों को हाल के चुनावों में बड़ी सफलता नहीं मिली है, लेकिन इनके द्वारा वोटों का विभाजन जरूर हो सकता है।
गुपकार गठबंधन का पतन
नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और CPI (M) ने गुपकार गठबंधन बनाकर जिला विकास परिषद (DDC) चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन अब यह गठबंधन बिखरता नजर आ रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने पर विचार कर रही है।
बीजेपी की चुनौतियाँ
जम्मू क्षेत्र में बीजेपी को आतंकी हमलों में वृद्धि और कुछ क्षेत्रों में अपने जनाधार में कमी का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, भाजपा जम्मू और उधमपुर निर्वाचन क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाए हुए है, और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ाए हुए है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनाव ऐतिहासिक होने वाले हैं। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद यह पहला मौका है जब यहां चुनाव हो रहे हैं। बदलते समीकरण, नए दल और क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं। परिणाम चाहे जो भी हों, यह चुनाव जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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