मूवी रिव्‍यू: सजनी शिंदे का वायरल वीडियो

सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम अंग बन चुका है। जिंदगी का दुख-सुख हम अपने सोशल मीडिया पर दिखाने चाहते है, लेकिन उसे कंट्रोल करते हुए। मगर क्या हो जब आपकी जिंदगी का एक डार्क साइड आपके कंट्रोल से बाहर जाकर पब्लिक प्‍लेटफॉर्म पर आ जाए। और तो और वो सच वायरल होकर आपकी जिंदगी को रातों-रात तहस-नहस कर दे। गुजराती फिल्म ‘रॉन्ग साइड राजू’ के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके निर्देशक मिखिल मुसाले की फिल्म ‘सजनी शिंदे का वायरल विडियो’ सोशल मीडिया की इसी त्रासदी पर बात करती है।

‘सजनी श‍िंदे का वायरल वीडियो’ की कहानी

फिल्म की कहानी स्कूल टीचर सजनी शिंदे (राधिका मदान) के इर्द-गिर्द घूमती है। वो एक पैशनेट टीचर, प्यारी मंगेतर और परफेक्ट बेटी बनना चाहती है। किसी हद तक वह यह सब है भी। मगर एक रात स्कूल की सिंगापुर ट्रिप में पार्टी करते हुए उसका एक अश्लील विडियो वायरल हो जाता है। अब उसकी टीचर, बेटी और प्यारी मंगेतर की इमेज तार-तार होने लगती है। स्कूल की सख्त और अनुशासन प्रिय प्रिंसिपल (भाग्यश्री) उसे स्कूल से निकाल देती है। उसका मंगेतर सिद्धांत (सोहम मजूमदार) उससे आंखें फेर लेता है। प्रख्यात नाटककार पिता सूर्य कांत शिंदे (सुबोध भावे) और परिवार के लिए भी वह कलंक बन जाती है।

वायरल हुए वीडियो की शर्मिंदगी से त्रस्त होकर सजनी फेसबुक पर एक जज्बाती पोस्ट लिखकर गायब हो जाती है। उस पोस्ट में वो अपने पिता और मंगेतर पर इल्जाम लगाती है। गायब हुई सजिनी के केस की तहकीकात करने के लिए बेला बारूद (निमरत कौर) को नियुक्त किया जाता है। बेला जैसे -जैसे केस की गहराई में जाती है। शक की सुई परिवार से लेकर मंगेतर तक कई लोगों पर घूमती है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, सजनी के परिवार के कई राज सामने आते हैं। मंगेतर सिद्धांत का भी एक अलग चेहरा सामने आता है। लेकिन क्या गायब हुई सजनी मर चुकी है? अगर मर चुकी है, तो क्या उसने आत्महत्या की या उसे किसी ने मार दिया? इन सवालों के जवाब आपको फिल्म देखने के बाद ही मिल पाएंगे।

‘सजनी श‍िंदे का वायरल वीडियो’ मूवी रिव्‍यू

डायरेक्‍टर मिखिल मुसाले की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने एक बेहद प्रासंगिक विषय ‘सोशल मीडिया के वायरलिज्म’ पर कहानी बुनी है। फिल्म का लेखन भी उन्होंने ही किया है। वो अपनी कहानी की शुरुआत ईमानदारी से करते हैं, जहां एक आम टीचर को उन्होंने केंद्र में रखा है। थ्रिलर स्पेस में वे कहानी के टेंशन और सस्पेंस को बनाए रखने में कामयाब रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के मकड़जाल, पारिवारिक विषमताओं, सोशल प्रेशर, महिलाओं के प्रति मिसोजनिस्ट सोच, जैसे पहलुओं से इसे परतदार बनाया है। फिल्‍म के सीन्‍स में बीते हुए कल और वर्तमान का सिलसिला तनाव बनाए रखता है, मगर अंत में जब सारे राज खुलते हैं, तो क्लाइमेक्स फीका पड़ जाता है।

‘सजनी श‍िंदे का वायरल वीडियो’ का ट्रेलर

‘वुमन कार्ड कोई आधार कार्ड नहीं, जो हर जगह चल जाए’, औरत को अपने हक को हर बार जस्टिफाय क्यों करना पड़ता है।’ फिल्‍म में इस जैसे संवाद चुटीले हैं। बीते कुछ साल से हमारी फिल्मों में उत्तर भारत और पंजाबियत का बोलबाला रहा है, ऐसे में पुणे और मराठी पृष्ठभूमि पर बुनी गई ये कहानी नयापन लाती है। हां, मराठी डायलॉग न समझने वाली ऑडियंस को सबटाइटल पर ध्यान देना होगा। फिल्म का टोन थोड़ा डार्क है। फिल्म कई जगहों पर इमोशनल कनेक्ट के अभाव से भी गुजरती है। कहानी के कुछ ट्रैक ऐसे हैं, जिनका जवाब नहीं मिल पाता। त्रिभुवन बाबू की सिनेमैटोग्राफी देखने लायक है। बैकग्राउंड म्यूजिक पर कंजोजर-सिंगर हितेश सोनिक ने अच्छा काम किया है। फिल्म का रैप सॉन्ग इसके विषय को मजबूत बनाता है।

अभिनय के मामले में ‘लंच बॉक्स’ और ‘दसवीं’ फेम निमरत कौर मैदान मार ले जाती हैं। सख्त मिजाज और साफगोई पुलिस अफसर की भूमिका में उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलिवरी मजेदार है। राधिका मदान, एक बेटी और मंगेतर वाली जज्बाती भूमिकाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं। उन्होंने अपने किरदार को इमोशनली जिया है। सजनी श‍िंदे के मंगेतर के रूप में सोहम मजूमदार ने दमदार प्रस्तुति दी है। भाग्यश्री ने अपनी अलहदा भूमिका के साथ न्याय किया है। सजनी के पिता के रूप में सुबोध भावे को पर्दे पर देखना अच्छा लगता है। सुमित व्यास जैसे अच्छे कलाकार को कम स्क्रीन स्पेस दिया गया है, हालांकि फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट दमदार है।

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