मूवी रिव्‍यू: तेजस

तेजस’ की कहानी

कहानी में तेजस गिल (कंगना रनौत) भारतीय वायुसेना की बहादुर लड़ाकू विमान पायलट है, जो फिल्म के पहले ही दृश्य में अपने सीनियर्स के ऑर्डर्स की परवाह किए बगैर जान जोखिम में डाल एयर फोर्स के बड़े अधिकारी की जान बचाती हैं। तेजस के इस कदम पर जांच कमिटी उस पर एक्शन लेने वाली होती है, लेकिन तभी खबर आती है कि पाकिस्तानी आतंकवादियों ने देश के एक बहुत ही साहसी खुफिया एजेंट को बंधक बना ल‍िया है। अब यदि हिंदुस्तान ने पाकिस्तान की शर्त नहीं मानी, तो वो उसका सर कलम कर देंगे। भारतीय खुफिया एजेंट के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तेजस और उसकी साथी पायलट अफिया (अंशुल चौहान) को भेजा जाता है। ये दोनों जब रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने जाती हैं, तब इन्हें पता चलता है कि आतंकवादी राम मंदिर पर बम धमाका कर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच दंगा करवाना चाहते हैं। तेजस का एक दर्दनाक अतीत भी है, जिसमें 26/11 के आंतकी हमले में वो अपने माता-पिता, भाई और मंगेतर को खो चुकी है। बस उसका वही अतीत उसे अपनी जान कुर्बान कर आंतकियों का खात्मा करने के लिए प्रेरित करता है।

‘तेजस’ मूवी रिव्‍यू

निर्देशक सर्वेश मेवाड़ा की कहानी में दो हीरोइनों को अनकन्वेंशनल भूमिकाओं में देखना अच्छा लगता है। लेकिन फिल्म की समस्या यह है कि निर्देशक का पूरा जोर नायिकाओं के हीरोइज्म को स्थापित करने में जाता है, कहानी को कसने में नहीं। कहानी का फर्स्ट हाफ काफी धीमा है। सेकंड हाफ रफ्तार पकड़ता है, पर क्लाइमेक्स प्रिडेक्टिबल लगता है। वायुसेना में तेजस की ट्रेनिंग, परिवार के साथ उसका रिश्ता और उसका लव ट्रैक राहत वाले हैं, मगर रेस्क्यू ऑपरेशन में हवा में फाइट और पाकिस्तान में घुसकर भारत के सीक्रेट एजेंट को छुड़ा लाने की तकनीक कन्विंसिंग नहीं लगती।

‘तेजस’ मूवी का ट्रेलर

‘तेजस’ के एरियल स्टंट्स प्रभावित करते हैं, हालांकि, फिल्म का VFX कमजोर कड़ी है। कई दृश्य टॉम क्रूज की फिल्मों की याद दिलाते हैं। कहानी भावनात्मक स्तर पर जोड़ने में कमतर साबित होती है। तेजस और अफिया के बीच का डायलॉग, ‘अगर हम सफल नहीं हुए तो लोग कहेंगे लड़कों को भेजना चाहिए था’ गैरपरंपरागत क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा खुद को साबित करने के दबाव को भी दर्शाती है। हरि वेदांतम की सिनेमैटोग्राफी रेगिस्तानों में हवाई हमलों, उड़ानों और लड़ाई को आकर्षक ढंग से दर्शाते हैं। शाश्वत सचदेव के संगीत में, ‘दिल है रांझणा और ‘जान दा जैसे गाने अच्छे बन पड़े हैं।

यह पूरी फिल्म कंगना रनौत के कंधों पर टिकी है। फिल्म में उनके 16 साल की जर्नी को दिखाया गया है। इसमें डीएजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। वे अपनी भूमिका को खूबसूरती से अंजाम देती हैं। फाइटर पायलेट के रूप में उनकी चपलता और शार्पनेस नजर आती है। उनकी साथी पायलट आफिया के रूप में अंशुल चौहान ने अपने रोल को सशक्त ढंग से निभाया है। तेजस के प्रेमी के रोल में वरुण मित्रा स्वीट लगे हैं। आशीष विद्यार्थी ने उच्च अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है। फिल्‍म की सपोर्टिंग कास्ट को ज्यादा मौका नहीं मिला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *