’12वीं फेल’ की कहानी
मध्य प्रदेश के चंबल के गांव का लड़का 12वीं की परीक्षा में फेल हो जाता है, क्योंकि नए डीपीएस दुष्यन्त सिंह (प्रियांशु चटर्जी) शिक्षकों को छात्रों को बोर्ड परीक्षा में नकल करने से रोकते हैं। मनोज इसके अगले साल थर्ड डिविजन से बोर्ड एग्जाम पास करता है। वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए दिल्ली पहुंचता है। उसके पास इस परीक्षा के लिए जरूरी लगन तो है, लेकिन ऐसा करने के लिए पढ़ाई की वैसी कुशलता नहीं है। उसे तो यह भी नहीं पता कि UPSC या IPS प्रोफाइल जैसी कोई चीज होती है। मनोज आगे कैसे अपने गुरु (अंशुमान पुष्कर), दोस्तों और प्रेमिका श्रद्धा जोशी (मेधा शंकर) मदद से अपने सपने को साकार करता है, फिल्म इसी की बानगी है।
’12वीं फेल’ का ट्रेलर
’12वीं फेल’ मूवी रिव्यू
विधु विनोद चोपड़ा एक बेहतरीन फिल्ममेकर हैं और उन्होंने यह बात एक बार फिर साबित की है। ’12वीं फेल’ का हर ट्रैक अपने आप में एक कहानी है। मनोज की गुमराह जवानी, सही-गलत का पता नहीं होना, उसके संघर्ष और हर बार शून्य से शुरुआत। बतौर दर्शक आप खुद को मनोज की सफलता या असफलता में शामिल महसूस करते हैं। जब वह UPSC के आखिरी चरण (इंटरव्यू) के लिए जाता है, तो पर्दे का तनाव आपके जेहन में भी बढ़ जाता है। शांत माहौल और बैकग्राउंड स्कोर आप आपनी सांसों में भी महसूस करते हैं।
फिल्म की कहानी बड़े ही सहज और सरल भाव में बहती चली जाती है। यह एपीजे अब्दुल कलाम और बीआर अंबेडकर जैसे दिग्गजों को आइडल मानने वालों को याद दिलाती है- शिक्षित हो, आंदोलन करो, संगठित हो। फिल्म इस बात पर भी बड़ी बारीकी से रोशनी डालती है कि क्यों भ्रष्ट राजनेता चाहते हैं कि समाज के युवा मूर्ख बने रहें, ताकि उन्हें दबाया जा सके और उनपर शासन किया जा सके।
एक्टिंग के मोर्चे पर विक्रांत मैसी ने अपने किरदार को पूरे आत्मविश्वास के साथ निभाया है। वह हर मोर्चे पर अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करते हैं। उसके अंदर गुस्सा है, वह असहाय है, वह दृढ़ निश्चय कर चुका है कि वक्त की धारा को अपने मुताबिक मोड़कर ही दम लेगा। प्रियांशु चटर्जी ने डीसीपी के रूप में अपनी छोटी सी भूमिका में भी छाप छोड़ी है। इस किरदार के लिए उसकी ईमानदारी ही असली बहादुरी है। एक कलाकार के रूप में उनकी कुशलता उस सीन में देखने लायक है, जहां वह अपने सीनियर अधिकारी के तौर पर मनोज से मिलते हैं। यहां उनका रिएक्शन एक सीनियर अफसर के प्रति सम्मान और एक युवा को सही रास्ता चुनने के लिए प्रेरित करने वाला है, जो बेहतरीन लगा है। मनोज के माता-पिता के रूप में, गीता अग्रवाल शर्मा और हरीश खन्ना ने भी छोटे से रोल में पहचान छोड़ी है।
