J&K: भारत के चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए समय को पूरी तरह उपयुक्त बताया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिसंबर में 30 सितंबर तक चुनाव कराने के निर्देश के बाद, सीईसी ने शुक्रवार को इस क्षेत्र में चुनाव की तैयारियों और सुरक्षा परिदृश्य का आकलन किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त की बयानबाजी
सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए बिल्कुल सही समय है” और उन्होंने हाल ही में हुए संसदीय चुनावों की सफलता को आगे बढ़ाने की बात की। उन्होंने चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बात की और कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने चुनावों के लिए तत्परता जताई है।
चुनावी तैयारी और सुरक्षा
- मतदान केंद्रों की संख्या: जम्मू-कश्मीर में कुल 11,838 मतदान केंद्र होंगे, जिनमें से 9,100 स्थानों पर मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सभी मतदान केंद्रों पर 100% सीसीटीवी कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा।
- मतदाताओं की संख्या: जम्मू-कश्मीर में कुल 89.87 लाख मतदाता होंगे।
- विधानसभा सीटों का परिसीमन: परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में 90 विधानसभा क्षेत्र होंगे। इनमें 47 सीटें कश्मीर और 43 सीटें जम्मू में होंगी।
- विशेष मतदान केंद्र: दिल्ली, जम्मू और उधमपुर में कश्मीरी पंडितों के लिए 26 विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- सुरक्षा कवरेज: विपक्षी दलों ने पर्याप्त सुरक्षा कवरेज की मांग की है, विशेष रूप से उन नेताओं के लिए जिनकी सुरक्षा हाल ही में घटा दी गई थी।
आगामी चुनावों के प्रति आशावाद
सीईसी ने यह भी आश्वस्त किया कि सुरक्षा बल और प्रशासन चुनावों के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि अमरनाथ यात्रा 19 अगस्त को समाप्त हो जाएगी और इसके बाद मतदाता सूची में विशेष संशोधन के साथ 20 अगस्त को अंतिम सूची जारी की जाएगी।
राजनीतिक दलों की भूमिका
गुरुवार को, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की टीम से मुलाकात की और समान अवसर की मांग की। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा की अपील की।
निष्कर्ष
J&K: जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारी अंतिम चरण में है और चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को संपूर्ण निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ पूरा करने का आश्वासन दिया है। आगामी चुनाव जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य को एक नई दिशा दे सकते हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रक्रिया में कितनी भागीदारी और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
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