Vinesh Phogat: विनेश फोगट ने दिल्ली की सड़कों पर बर्बरता से घसीटे जाने के महीनों बाद पेरिस ओलंपिक 2024 में कुश्ती की दुनिया में एक नई मिसाल कायम की है। उनके सफर की इस खास कहानी ने खेल जगत में प्रेरणा की नई लहर पैदा की है। आइए, जानें कैसे विनेश ने अपने संघर्ष और संघर्ष के बाद ओलंपिक में सफलता का स्वाद चखा।
साल 2023 की शुरुआत: विरोध की आग
18 जनवरी 2023 को, विनेश फोगट और अन्य प्रमुख पहलवान जंतर-मंतर पर जुटे और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पहलवानों ने भूषण पर यौन शोषण और धमकी देने के आरोप लगाए। प्रदर्शन के बाद, तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक जांच समिति गठित करने का आश्वासन दिया, जिससे विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ।
मई 2023: गिरफ्तारियां और संघर्ष
दिल्ली पुलिस ने विनेश और अन्य पहलवानों को नई संसद तक मार्च करने के लिए हिरासत में ले लिया, जिसके बाद पहलवानों ने हरिद्वार जाकर अपने पदक गंगा में फेंक दिए। इस संघर्ष ने उनकी स्थिरता और समर्पण को दर्शाया।
अगस्त 2023: चोट और छूट
अगस्त 2023 में, विनेश को घुटने की चोट के कारण एशियाई खेलों से चूकना पड़ा। हालांकि, विनेश की उम्मीदें जगी रही और उसने अपने करियर को नए सिरे से संवारने का मन बना लिया।
फरवरी 2024: शानदार वापसी
फरवरी 2024 में, UWW ने WFI के निलंबन को हटा लिया और विनेश ने राष्ट्रीय स्तर पर 55 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इस जीत ने उसकी वापसी की शुरुआत की।
मार्च 2024: दो भार वर्गों में शानदार प्रदर्शन
मार्च 2024 में, विनेश ने एक ही दिन में दो ओलंपिक भार वर्ग (50 किग्रा और 53 किग्रा) में मुकाबला किया और एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप और एशियाई ओलंपिक खेलों के क्वालीफायर में जीत हासिल की।
अप्रैल 2024: पेरिस ओलंपिक की टिकट
अप्रैल 2024 में, विनेश ने पेरिस ओलंपिक के लिए अपनी जगह पक्की कर ली। उन्होंने एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर के फाइनल में 50 किग्रा वर्ग में ओलंपिक कोटा अर्जित किया, जिससे उनकी सफलता की राह और भी स्पष्ट हो गई।
अगस्त 2024: पेरिस ओलंपिक में ऐतिहासिक जीत
दिल्ली की सड़कों पर संघर्ष और धक्का देने के महीनों बाद, विनेश फोगट ने पेरिस ओलंपिक 2024 में एक बड़ा मुकाम हासिल किया। विनेश ने जापान की चार बार की विश्व चैंपियन यूई सुसाकी को 3-2 से हराया और विश्व की नंबर 1 पहलवान को हराने वाली पहली भारतीय बन गईं। पेरिस खेलों में, उन्होंने यूक्रेन की लिवाच को 7-5 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
विनेश फोगट की यह यात्रा केवल एक व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह समर्पण, संघर्ष और दृढ़ता की प्रतीक भी है। उनके इस अद्वितीय सफर ने यह साबित कर दिया है कि कठिनाइयों के बावजूद सफलता की ऊँचाइयों को छूना संभव है।
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