वायनाड त्रासदी: अवैध खनन और निर्माण ने बढ़ाई आपदा, पर्यावरण मंत्री ने राज्य सरकार पर साधा निशाना

Wayanad Tragedy: अवैध खनन और निर्माण ने बढ़ाई आपदा

Wayanad Tragedy: केरल के वायनाड जिले में हाल ही में हुई त्रासदी का मुख्य कारण अवैध खनन, अनियंत्रित निर्माण और अनियमित वाणिज्यिक गतिविधियों को बताया जा रहा है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और भौगोलिक पहलुओं की अनदेखी की गई।

Wayanad Tragedy:पर्यावरण मंजूरी पर केंद्र का रुख

पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र ने वायनाड में किसी भी विकासात्मक गतिविधि के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी नहीं दी है। केवल पिछले साल फोर लेन अप्रोच के साथ ट्यूब यूनिडायरेक्शनल टनल रोड (2+2 लेन) के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी, लेकिन इस परियोजना का निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है।

Wayanad Tragedy:त्रासदी के पीछे के कारण

पर्यावरण मंत्री ने कहा, “जब ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी दी जाती है, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि मिट्टी की स्थलाकृति, भू-आकृति विज्ञान, ढलान कोण और वनस्पति क्या है। पिछले 10 वर्षों में, राज्य सरकार ने इन मामलों पर ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि जब भारी बारिश हुई, तो हमने इस पैमाने की बड़ी आपदा देखी।”

केरल सरकार का विरोध

केरल के वन मंत्री ए.के. ससीन्द्रन ने यादव के बयानों की निंदा की और कहा कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने का यह सही समय नहीं है। उन्होंने कहा, “यह कहना कि यह आपदा केरल के गलत कार्यों के कारण आई, यह संदेह पैदा करता है कि केंद्र राज्य को उचित वित्तीय सहायता देने से इनकार करने की योजना बना रहा है।”

पर्यावरण मंत्रालय की योजना

पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में केरल ने तीन खदानों के लिए पर्यावरण मंजूरी दी है, जिनमें से दो वायनाड जिले में ग्रेनाइट पत्थर के लिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि माधव गाडगिल और के. कस्तूरीरंगन समितियों की सिफारिशों पर पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को अधिसूचित करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना तैयार की गई थी। हालांकि, राज्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए।

गाडगिल समिति की सिफारिशें

2011 में, गाडगिल के नेतृत्व वाली समिति ने सिफारिश की थी कि पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखला के 75% हिस्से को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील घोषित किया जाना चाहिए। इसमें केरल के वायनाड जिले को ईएसजेड 1 श्रेणी में रखने की भी सिफारिश की गई थी, जो उच्चतम पारिस्थितिक संवेदनशीलता को संदर्भित करता है।

पश्चिमी घाट को ईएसए घोषित करने की योजना

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है, जिसमें वायनाड के गाँव भी शामिल हैं जहाँ भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर विनाश किया है। इस प्रस्ताव को 1 अगस्त को एक मसौदा अधिसूचना के रूप में प्रसारित किया गया था।

यह घटनाक्रम वायनाड जिले में हुई भूस्खलन की घटनाओं और पर्यावरणीय अनदेखी के परिणामस्वरूप सामने आई आपदा की गंभीरता को उजागर करता है। राज्य और केंद्र सरकार के बीच इस मुद्दे पर टकराव जारी है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में किस प्रकार की नीतियाँ और योजनाएँ बनाई जाती हैं ताकि ऐसी आपदाओं को रोका जा सके।

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