वायनाड को हरित संरक्षण मिलने की उम्मीद: पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) का प्रस्ताव

Wayanad: को हरित संरक्षण: पश्चिमी घाट में ईएसए प्रस्ताव"

Wayanad: पश्चिमी घाट, जिसे वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट माना जाता है, में वायनाड के लिए एक नई उम्मीद जगी है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करने का एक मसौदा अधिसूचना जारी किया है। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में वायनाड में भूस्खलन के कारण 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग लापता हैं।

Wayanad: पश्चिमी घाट का प्रस्तावित ईएसए क्षेत्र

मसौदा अधिसूचना के अनुसार, पश्चिमी घाट के 59,940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। यह क्षेत्र छह राज्यों – गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, और तमिलनाडु – में फैला हुआ है और इसका आकार लगभग 37% पश्चिमी घाट की कुल क्षेत्रफल के बराबर है। यह प्रस्ताव 2011 में माधव गाडगिल के नेतृत्व में बने पैनल द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर है, जिन्होंने मूल रूप से इस क्षेत्र के 75% को ईएसए के रूप में वर्गीकृत करने की सिफारिश की थी।

Wayanad: प्रस्तावित नियम और प्रतिबंध

इस मसौदा अधिसूचना में प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ईएसए में खनन, उत्खनन, रेत खनन, ताप विद्युत संयंत्रों और प्रदूषणकारी उद्योगों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा। इसके अतिरिक्त, नई निर्माण परियोजनाओं और टाउनशिप विकास पर भी सीमाएं लगाई जाएंगी। 20,000 वर्ग मीटर से अधिक के निर्मित क्षेत्र वाले भवनों और 50 हेक्टेयर या उससे अधिक के क्षेत्र वाली नई टाउनशिप परियोजनाओं पर रोक लगाई जाएगी। जलविद्युत परियोजनाओं और कम प्रदूषणकारी उद्योगों को भी विनियमित किया जाएगा।

राज्य सरकारों की भूमिका

इस प्रस्तावित ईएसए वर्गीकरण को अंतिम रूप देने का निर्णय पश्चिमी घाट के राज्य सरकारों पर निर्भर है। केरल के वन एवं पर्यावरण मंत्री ए.के. ससीन्द्रन ने कहा कि उन्हें मसौदा अधिसूचना का पूरी तरह से अवलोकन करना होगा और फिर कोई निर्णय लेना होगा। पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य सरकारों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो राज्यों के सुझावों की समग्र रूप से फिर से जांच करेगी।

संरक्षण की आवश्यकता और चुनौतियां

पश्चिमी घाट का क्षेत्र अद्वितीय पारिस्थितिक तंत्र से भरपूर है, जिसमें अनेक स्थानिक प्रजातियाँ और विशेष आवास शामिल हैं। गाडगिल पैनल और कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों के बावजूद, ईएसए का कार्यान्वयन कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन प्रयासों में राज्य सरकारों के विरोध, विकासात्मक आकांक्षाओं और पारिस्थितिक संरक्षण की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

इस प्रस्तावित संरक्षण क्षेत्र की स्वीकृति से वायनाड और पश्चिमी घाट की पारिस्थितिक प्रणाली को महत्वपूर्ण सुरक्षा मिल सकती है, जिससे इस क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी जारी है और यह देखना होगा कि इसके परिणाम किस दिशा में जाते हैं।

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