Mathura: मथुरा में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद के भूखंड पर कब्जे के विवाद को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अहम निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत ने इस मसले पर सुनवाई के लिए 12 अगस्त की तारीख तय की है। हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के एक हिस्से को गिराकर किया गया था।
Mathura: मामले का विवरण
हिंदू याचिकाकर्ता शाही ईदगाह मस्जिद के भूखंड पर कब्जे की अनुमति चाहते हैं। उनका कहना है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर के एक हिस्से को गिराकर इस मस्जिद का निर्माण किया गया था।
वहीं, मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए इस मामले पर रोक लगाने की अपील की है। यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 को मौजूद धार्मिक संरचनाओं की स्थिति बनाए रखने का प्रावधान करता है, हालांकि अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर यह लागू नहीं होता।
Mathura: उच्च न्यायालय का आदेश
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मस्जिद प्रबंधन समिति की आपत्ति को स्वीकार नहीं किया और 12 अगस्त से सुनवाई की तारीख तय की है। हिंदू पक्ष के वकील प्रभास पांडे ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे और किसी भी अपील के खिलाफ कैविएट भी दायर करेंगे।”
मस्जिद समिति ने अभी तक अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन स्थानीय मुस्लिम नेता फाजिल अहमद ने कहा, “हम कोर्ट के आदेश का अध्ययन करेंगे और उसके अनुसार योजना बनाएंगे।”
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “यह एक स्वागत योग्य निर्णय है। हमें उम्मीद है कि हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।” भाजपा के कुछ सदस्य और संत इस निर्णय की खुशी में मिठाइयाँ बाँट रहे हैं।
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा, “यह आदेश शाही ईदगाह के खिलाफ चल रही याचिकाओं में मील का पत्थर साबित होगा।”
निष्कर्ष
मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद पर इस विवादित मामले की सुनवाई 12 अगस्त से शुरू होने वाली है। इस मामले का फैसला आने वाले दिनों में धार्मिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से महत्वपूर्ण हो सकता है।
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