CBI: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में अपना पहला आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इस आरोपपत्र में कुल 13 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें चार अभ्यर्थी, एक जूनियर इंजीनियर और दो प्रमुख सरगना शामिल हैं। सभी आरोपियों पर आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
इस पेपर लीक के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे और परीक्षा दोबारा कराने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई व्यवस्थागत उल्लंघन नहीं हुआ है। सीबीआई ने जांच के दौरान पाया कि नीतीश कुमार और अमित आनंद दो प्रमुख सरगना हैं, जबकि चार अभ्यर्थियों में आयुष कुमार, अनुराग यादव, अभिषेक कुमार और शिवनंदन कुमार शामिल हैं।
इस मामले में बिहार के दानापुर नगर परिषद के जूनियर इंजीनियर सिकंदर यादवेंदु का भी नाम है। सीबीआई का मानना है कि नीतीश कुमार मुख्य आरोपी है और उसने अमित आनंद और सिकंदर यादवेंदु के साथ मिलकर 30-32 लाख रुपये प्रति छात्र की दर से पेपर लीक करने की साजिश रची थी।
पुलिस की जांच के अनुसार, यादवेंदु ने कुमार और आनंद को बताया था कि उसके पास चार छात्र हैं जो पेपर खरीदने के लिए तैयार हैं। 4 मई की रात, अमित ने उन चार छात्रों को बुलाया और लीक हुए प्रश्नपत्र को हल करने और उत्तर याद करने के लिए कहा। सीबीआई ने इस मामले में उन्नत फोरेंसिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सीसीटीवी फुटेज और लोकेशन एनालिसिस का उपयोग किया है।
सीबीआई ने अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया है और 58 स्थानों पर तलाशी ली है। मुख्य आरोपी नीतीश कुमार पहले ही बिहार लोक सेवा (बीपीएससी) परीक्षा में पेपर लीक के मामले में जेल जा चुका है। इस मामले में सीबीआई ने छह प्राथमिकी दर्ज की हैं और आगे की जांच जारी है।
नीट-यूजी परीक्षा, जो 5 मई को पूरे भारत में आयोजित की गई थी, में 23 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे। यह परीक्षा MBBS, BDS, आयुष और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है।
सीबीआई का कहना है कि अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है और मामले के अन्य पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
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