Diksha Dagar: भारतीय गोल्फ की प्रतिभा दीक्षा डागर को हाल ही में पेरिस में एक कार दुर्घटना का शिकार होना पड़ा है। इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप, दीक्षा के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, हालांकि उन्हें गंभीर चोटें नहीं आई हैं। दुर्भाग्यवश, उनके परिवार के अन्य सदस्यों में से उनकी मां को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उन्हें कमर में गंभीर चोटें आई हैं।
दीक्षा डागर पेरिस में 7 अगस्त से शुरू होने वाली महिला गोल्फ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वहां पहुंची थीं। हादसा 30 जुलाई की शाम को हुआ, जब दीक्षा और उनके परिवार के चार सदस्य कार में सवार थे। हादसे के बाद, दीक्षा की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उनकी मां की गंभीर स्थिति के चलते परिवार में चिंता बनी हुई है।
दीक्षा डागर, जिन्होंने 2019 में अपने पेशेवर गोल्फ करियर की शुरुआत की थी, को विश्व रैंकिंग के आधार पर क्वोटा सिस्टम के तहत सीधे पेरिस ओलंपिक्स 2024 के लिए एंट्री मिल गई थी। यह दीक्षा के ओलंपिक खेलों में भाग लेने का दूसरा मौका है। उन्होंने 2020 के टोक्यो ओलंपिक्स में संयुक्त रूप से 50वें स्थान पर रहकर खेलों में भाग लिया था।
विशेष बात यह है कि दीक्षा डागर उन चुनिंदा एथलीटों में शामिल हैं जिन्हें सुनने में समस्या है। जन्म से ही सुनने में दिक्कत के बावजूद, उन्होंने अपने खेल करियर में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने 2017 Deaflympics में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वहां सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
दीक्षा की उपलब्धियों की सूची में एक और ऐतिहासिक तथ्य शामिल है। उन्होंने 2021 के टोक्यो ओलंपिक्स में भाग लेकर डेफलंपिक्स और ओलंपिक्स दोनों में भाग लेने वाली दुनिया की पहली एथलीट बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके अलावा, वे अदिति अशोक के बाद लेडीज यूरोपीय टूर जीतने वाली दूसरी भारतीय गोल्फर हैं।
पेरिस ओलंपिक खेलों में दीक्षा डागर के अलावा अदिति अशोक भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। दीक्षा की हाल की दुर्घटना ने उनकी प्रतियोगिता की तैयारी को प्रभावित किया है, और परिवार को इस मुश्किल समय में उनकी मां की गंभीर हालत के बारे में चिंता बनी हुई है।
इस दुर्घटना के बावजूद, दीक्षा डागर के खेल के प्रति समर्पण और उनकी उपलब्धियों ने उन्हें एक प्रेरणास्त्रोत बना दिया है। उनकी मुश्किलें और संघर्ष उनके खेल करियर में एक नई चुनौती को प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनकी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प ने उन्हें वैश्विक मंच पर एक विशेष स्थान दिलाया है।
